नए जमाने के इंटरनेट आधारित टेक शेयरों को अभी और मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। इसकी वजह ये है कि अभी और प्री-आईपीओ निवेशक अब इन शेयरों से निकलते नजर आ सकते हैं। कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज द्वारा संकलित आंकड़ों के मुताबित मार्च 2023 तक प्राइवेट इक्विटी और वेंचर कैपिटल फर्मों की लिस्टेड भारतीय इंटरनेट कंपनियों में लगभग 7 अरब डॉलर की हिस्सेदारी थी। कोटक का मानना है कि अगर बाजार इतना वोलैटाइल न होता तो ये हिस्सेदारी और कम होती।
बाजार की स्थितयां खराब होने के कारण बिकवाली की योजना टली
कोटक ने अपनी हालिया रिपोर्ट में कहा है कि कमजोर बाजार स्थितियों और हाल ही में कुछ भारतीय इंटरनेट कंपनियों की डिरेटिंग की वजह से प्री-आईपीओ निवेशकों ने इन कंपनियों में अपनी बिकवाली की योजना को होल्ड पर रखा है। बाजार की स्थितयां सुधरते ही ये बिकवाली होती दिख सकती है।
भारत में पिछले कुछ वर्षों में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश बढ़ा
भारत में पिछले कुछ वर्षों में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश बढ़ा है। इसी अनुपात में इसमें बिकवाली भी देखने को मिली है। कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज की एक रिपोर्ट के मुताबिक वित्त वर्ष 2023 की पहली छमाही में भारत से 14 अरब डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश बाहर जाता दिखा। जबकि वित्त वर्ष 2022 में प्रत्यक्ष विदेशी निवेशकों की तरफ से 29 अरब डॉलर और वित्त वर्ष 2021 में 18 अरब डॉलर की बिकवाली होती नजर आई थी।
सेकेंडरी मार्केट में नए जमाने की टेक आधारिक कंपनियों में बिकवाली बढ़ी
इस रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि पिछले 18 महीनों में आईपीओ की गति धीमी पड़ गई है। लेकिन शेयर होल्डिंग के पैटर्न और बल्क डील के आंकड़ो के विश्लेषण से पता चलता है कि सेकेंडरी मार्केट में नए जमाने की टेक आधारिक कंपनियों में बिकवाली बढ़ती नजर आई है। पिछले कुछ महीनों में हुए बड़े ब्लॉक डील इसका प्रमाण हैं। अलीबाबा ने One97 कम्युनिकेशंस में, Invesco ने Zee Entertainment Enterprises में , Sojitz Corp ने Motherson Sumi में और Kravis Ventures ने FSN E-Commerce Ventures में अपनी हिस्सेदारी बेची। इनमें से कुछ सौदों आंशिक हिस्सेदारी बेची गई थी। वहीं, कुछ सौदों में विक्रेता ने अपनी पूरी हिस्सेदारी बेची थी।
एफडीआई के ट्रेंड में बदलाव
कोटक के विश्लेषण से पता चलता है कि एफडीआई का फ्लो कम्यूनिकेशन, फाइनेंशियल और रिटेले सर्विसेज से निकल कर कंप्यूटर सर्विसेज और मैन्यूफैक्चरिंग की ओर मुड़ रहा है। 2019 में मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर में 9.6 अरब डॉलर का एफडीआई देखने को मिला था। ये 2022 में बढ़कर 16.3 अरब डॉलर हो गया। इसी अवधि के दौरान कंप्यूटर सर्विसेज सेक्टर के लिए एफडीआई निवेश 3.7 अरब डॉलर से बढ़कर 9 अरब डॉलर हो गया।
कोटक के एनालिस्ट्स का कहना है कि आगे मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर में एफडीआई निवेश में मजबूत ग्रोथ देखने को मिलेगी। इस प्रक्रिया को ग्लोबल सप्लाई चेन के विकास, चीन के मुकाबले भारत की सुधरती प्रतिस्पर्धी स्थिति और भारत में ऊर्जा के क्षेत्र में हो रहे बड़े बदलावों से सपोर्ट मिलेगा।
इस बीच, वित्त वर्ष 2019-2023 की अवधि में प्राइवेट इक्विटी निवेशक रिटेल सेक्टर से निकलकर फिनटेक और एडटेक की ओर शिफ्ट होते नजर आए हैं। हालांकि पिछले एक साल में इनकी रफ्तार कम हुई है।
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