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मुनाफे में ₹25000 करोड़ का डेंट! दोपहिया से लेकर चारपहिया, ऑटो सेक्टर FY26 में भारी नुकसान की आशंका पर परेशान

Auto Industry News: एक पॉलिसी ने ऑटो इंडस्ट्री की फिलहाल नींद उड़ा रखी है। इसके चलते वित्त वर्ष 2026 में इंडस्ट्री के मुनाफे को करीब ₹25 हजार करोड़ का झटका लग सकता है। इससे कई कंपनियों की नई तकनीकों में निवेश और अपनी ग्रोथ प्लान्स में तेजी लाने की क्षमता पर असर पड़ सकता है। जानिए पूरा मामला क्या है और इससे बचने के लिए इंडस्ट्री ने क्या किया

Edited By: Jeevan Deep Vishawakarmaअपडेटेड May 03, 2026 पर 2:25 PM
मुनाफे में ₹25000 करोड़ का डेंट! दोपहिया से लेकर चारपहिया, ऑटो सेक्टर FY26 में भारी नुकसान की आशंका पर परेशान
इंडस्ट्री बॉडी SIAM ने मिनिस्ट्री से कहा है कि CPCB (सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड) के पर्यावरणीय मुआवजे की लागत से जुड़े नोटिफिकेशन के बाद गाड़ी बनाने वाली कंपनियों को करीब ₹25 हजार करोड़ का तगड़ा वित्तीय शॉक लग सकता है।

देश की ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री को वित्त वर्ष 2026 के शुद्ध मुनाफे में करीब ₹25 हजार करोड़ की चोट लगने वाली है। इसकी वजह ये है कि एंवायर्नमेंट प्रोटेक्शन (एंड-ऑफ-लाइफ-वेईकल्स) रूल्स, 2025 यानी स्क्रैपेज पॉलिसी के तहत एक अकाउंटिंग स्टैंडर्ड क्लॉज एक्टिव हो गया है। इसमें ऑटो कंपनियों को पहले की बेची हुई गाड़ियों को लेकर पर्यावरणीय मुआवजे के लिए बजटीय प्रावधान करना पड़ सकता है। इंडस्ट्री के एग्जीक्यूटिव्स के मुताबिक इस साधारण से दिखने वाला प्रावधान को मिनिस्ट्री ऑफ एंवायर्नमेंट, फॉरेस्ट एंड क्लाइमेंट चेंज ने जनवरी 2025 में नोटिफाई किया था और जब इसके असर के बारे में ऑडिटर्स ने ध्यान दिलाया तो ऑटो कंपनियां परेशान हो गईं।

क्या है इस प्रावधान में?

जनवरी 2025 के नोटिफिकेशन के रूल 4(6) के मुताबिक अगर कोई गाड़ी कंपनी अपना कारोबार बंद करती है तो इसे कारोबार बंद होने से पहले तक मार्केट में उपलब्ध गाड़ियों को लेकर EPR (एक्सटेंडेड प्रोड्यूसर रिस्पांसिबिलिटी) का पालन करना होगा। इस नियम के चलते IND AS 37 लागू होता है, जिसके तहत इंडस्ट्री के एक एग्जीक्यूटिव के मुताबिक ऑटो कंपनियों को पिछले 20 वर्षों में बेची गईं प्राइवेट गाड़ियों के लिए और 15 वर्षों में कमर्शियल गाड़ियों के लिए EPR सर्टिफिकेट के खर्चों को लेकर बड़ा वित्तीय प्रावधान करना पड़ सकता है। इंडस्ट्री के एक और अधिकारी के मुताबिक इस नियम के चलते गाड़ी कंपनियों को पहले की बेची गई गाड़ियों को लेकर EPR प्रावधान करना होगा, चाहे उनका बाजार से बाहर निकलने का कोई इरादा न हो। इससे उनका पैसा फंसेगा और मुनाफे पर असर पड़ेगा।

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