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नए हफ्ते में ये शेयर करा सकते हैं अच्छी कमाई, एक्सपर्ट सुदीप शाह की चॉइस; 23050 के नीचे लुढ़का निफ्टी तो बढ़ सकती है सेलिंग

Nifty 50 इंडेक्स पिछले कुछ सेशंस से एक सीमित ट्रेडिंग रेंज में ही बना हुआ है। लंबे समय तक चले इस कंसोलिडेशन की वजह अहम सेक्टरों से मिल रहे अलग-अलग तरह के संकेत हैं। पिछले हफ्ते, बैंक निफ्टी ने व्यापक बाजार के मुकाबले मजबूती दिखाई और बढ़त के साथ बंद हुआ

Edited By: Ritika Singhअपडेटेड Jun 07, 2026 पर 11:11 AM
नए हफ्ते में ये शेयर करा सकते हैं अच्छी कमाई, एक्सपर्ट सुदीप शाह की चॉइस; 23050 के नीचे लुढ़का निफ्टी तो बढ़ सकती है सेलिंग
लगातार दूसरे हफ्ते बेंचमार्क इंडेक्स निफ्टी गिरावट के साथ बंद हुआ।

निफ्टी के निकट भविष्य में कंसोलिडेशन के दौर में बने रहने की संभावना है। 23,050 के नीचे साफ तौर पर गिरावट बिकवाली का दबाव बढ़ा सकती है। अगर इंडेक्स 23,600 के ऊपर बना रहा तो मोमेंटम में सुधार का संकेत मिलेगा। ऐसा मानना है SBI सिक्योरिटीज में टेक्निकल और डेरिवेटिव्स रिसर्च के हेड सुदीप शाह का। उन्होंने मनीकंट्रोल को दिए एक इंटरव्यू में निफ्टी और बैंक निफ्टी को लेकर क्या उम्मीद जताई, नए शुरू हो रहे सप्ताह के लिए उनके टॉप स्टॉक आइडिया क्या हैं, आइए जानते हैं...

क्या आपको लगता है कि आने वाले हफ्ते में निफ्टी में 'लोअर हाई-लोअर लो' का पैटर्न जारी रहेगा, जबकि टेक्निकल और मोमेंटम इंडिकेटर इसके पक्ष में नहीं हैं?

लगातार दूसरे हफ्ते बेंचमार्क इंडेक्स निफ्टी गिरावट के साथ बंद हुआ। वीकली टाइमफ्रेम पर, इंडेक्स ने दोनों तरफ शैडो वाली एक बेयरिश कैंडल बनाई। यह मार्केट पार्टिसिपेंट्स के बीच दुविधा और मजबूत भरोसे की कमी को दिखाती है। इससे भी अहम बात यह है कि निफ्टी पिछले 4 ट्रेडिंग सेशंस से अपने पिछले स्विंग लो के आस-पास ही घूम रहा है। इससे पता चलता है कि साफ तौर पर न तो बुल्स और न ही बेयर्स हावी हो पाए हैं। हालांकि ऊपर से देखने पर प्राइस एक्शन धीमा लग रहा है, लेकिन अंदरूनी टेक्निकल सेटअप मिली-जुली तस्वीर दिखा रहा है।

निफ्टी 50 ने मंगलवार को बुलिश बेल्ट होल्ड पैटर्न बनाया, जिसके बाद बुधवार को ग्रेवस्टोन डोजी बना। हालांकि, गुरुवार और शुक्रवार को किसी भी दिशा में कोई खास हलचल न होने से पता चलता है कि ट्रेडर्स वेट एंड वॉच की नीति अपना रहे हैं। नतीजतन, इंडेक्स पिछले कुछ सेशंस से एक सीमित ट्रेडिंग रेंज में ही बना हुआ है। लंबे समय तक चले इस कंसोलिडेशन की वजह अहम सेक्टरों से मिल रहे अलग-अलग तरह के संकेत हैं।

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