शेयर बाजार लगातार तीसरे दिन यानी बीते 10 जनवरी को भी गिरावट के साथ बंद हुआ। पिछले 3 सत्रों में बाजार को 13.51 लाख करोड़ का नुकसान झेलना पड़ा। दोनों सूचकांक करेक्शन के दौर में प्रवेश कर चुके हैं। कोई स्टॉक या इक्विटी इंडेक्स तब करेक्शन के दौर में माना जाता है, जब वह अपने हालिया उच्च स्तर से 10 पर्सेंट से नीचे पहुंच गया हो। अब यहां से बाजार किधर जाएगा, इस बारे में हमने एक्सपर्ट्स से बात की है।
जियोजित फाइनेंशियल सर्विसेज के चीफ इनवेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट डॉ. वीके विजयकुमार ने बताया, 'अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की गतिविधियों को लेकर जारी अनिश्चितता के मद्देनजर शेयर बाजार में निकट भविष्य में तेजी नहीं रहने के आसार हैं। FII की बिकवाली से किसी तरह की राहत मिलने की संभावना नहीं है। बाजार पर इसका दबाव बना रहेगा।'
एक और एक्सपर्ट का कहना था, 'चूंकि बाजार में तिमाही नतीजों का सीजन शुरू हो चुका है, लिहाजा यहां स्टॉक आधारित गतिविधियां देखने को मिल सकती हैं। TCS के नतीजों से संकेत मिलते हैं कि आईटी सेक्टर की मजबूती बनी रहेगी। प्रमुख बैंकों के नतीजे बेहतर रहेंगे, लेकिन FII की बिकवाली की वजह से यह सेक्टर नतीजों से हिसाब से परफॉर्म नहीं करेगा। फार्मा और चुनिंदा ऑटो स्टॉक, मसलन आयशर, महिंद्रा एंड महिंद्रा और बजाज ऑटो कमजोर मार्केट में आउटपरफॉर्मर्स हो सकते हैं।'
एक्सिस सिक्योरिटीज (Axis Securities) के रिसर्च हेड अक्षय चिंचालकर ने बताया, 'निफ्टी सूचकांक स्पष्ट तौर पर 23,583 से नीचे चला गया है। इसका साफ मतलब यह है कि 23,821 का लेवल ऊपर की तरफ अहम रेजिस्टेंस लेवल है। बेयर्स 23,238-23,355 के जोन को टारगेट करेगा।' नागराज शेट्टी के मुताबिक, 'शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव के दौर में निफ्टी का ट्रेंड लगातार नेगेटिव बना हुआ है। निचला लोअर सपोर्ट लेवल 23,260-23,000 के आसपास हो सकता है। इमिडिएट रेजिस्टेंस 23,600 के लेवल पर होगा।'
एक्सपर्ट ने रूपक डे ने बताया, 'शॉर्ट टर्म में सेंटीमेंट सुस्त रहने की संभावना है और सूचकांक 23,300 या 23,000 की तरफ जा सकता है। ऊपर की तरफ रेजिस्टेंस 23,550–23,600 पर है।'