Nifty अक्तूबर 2025 के बाद पहली बार 50-DMA पर पहुंचा, क्या इनवेस्टर्स को अब सावधान रहना चाहिए?

8 जनवरी को मार्केट में बड़ी बिकवाली देखने को मिली। सेंसेक्स 780 अंक यानी करीब 1 फीसदी गिरकर 84,180 अंक पर आ गया। निफ्टी भी 1 फीसदी यानी 264 अंक गिरकर 25,877 पर बंद हुआ। दिसंबर की शुरुआत में भी दोनों सूचकांक थोड़े समय के लिए इस लेवल के नीचे चले गए थे। लेकिन, तुरंत उस लेवल से रिकवर हो गए थे

अपडेटेड Jan 08, 2026 पर 8:23 PM
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जब तक निफ्टी 26,000 के 50-डीएमए के ऊपर बंद नहीं होता है, बाजार में और गिरावट देखने को मिल सकती है।

इंडियन मार्केट्स 8 जनवरी को पिछले साल अक्तूबर के बाद पहली बार 50-डे मूविंग एवरेज (डीएमए) पर आ गए। इससे मार्केट में गिरावट बढ़ने के संकेत मिले हैं। यह इनवेस्टर्स के लिए सावधानी बरतने का समय है। 1 अक्तूबर, 2025 के बाद सेंसेक्स और निफ्टी पहली 50-डीएमए पर आए हैं।

दिसंबर में थोड़े समय के लिए सूचकांकों ने यह स्तर छुआ था

8 जनवरी को मार्केट में बड़ी बिकवाली देखने को मिली। सेंसेक्स 780 अंक यानी करीब 1 फीसदी गिरकर 84,180 अंक पर आ गया। निफ्टी भी 1 फीसदी यानी 264 अंक गिरकर 25,877 पर बंद हुआ। दिसंबर की शुरुआत में भी दोनों सूचकांक थोड़े समय के लिए इस लेवल के नीचे चले गए थे। लेकिन, तुरंत उस लेवल से रिकवर हो गए थे।


टैरिफ से जुड़े अमेरिकी बिल से आई बाजार में गिरावट

इंडिपेंडेंट एनालिस्ट दीपक जसानी ने कहा कि जब तक निफ्टी 26,000 के 50-डीएमए के ऊपर बंद नहीं होता है, बाजार में और गिरावट देखने को मिल सकती है। ऐसे में निफ्टी गिरकर 25,460 के लेवल तक जा सकता है। बाजार में गिरावट की वजह अमेरिका का वह बिल है, जिसके पारित होने पर रूस से ऑयल खरीदने वाले देशों पर यूएस को ज्यादा पेनाल्टी लगाने का अधिकार मिल जाएगा।

ऑयल और कैपिटल गुड्स स्टॉक्स में ज्यादा गिरावट 

8 जनवरी को रिफाइनिंग कंपनियों के शेयरों में गिरावट आई। इनमें इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) शामिल थीं। चीन से आयात पर बंदिशें हटाने की खबर स कैपिटल गुड्स कंपनियों के शेयरों में भी गिरावट देखने को मिली। भेल और एलएंडी के शेयर गिरकर बंद हुए। जसानी ने कहा कि बार-बार निगेटिव खबरें आने से इनवेस्टर्स मुनाफावसूली करते हैं और कुछ समय के लिए खुद को निवेश से दूर रखते हैं।

निफ्टी और सेंसेक्स के लिए ये स्तर होंगे सबसे अहम

कुछ एक्सपर्ट्स का कहना है कि जब तक निफ्टी 26,000 से नीचे और सेंसेक्स 84,500 से नीचे बने रहते हैं, बाजार में कमजोरी जारी रह सकती है। ऐसे में निफ्टी गिरकर 25,750-25,700 तक जा सकता है, जबकि सेंसेक्स गिरकर 84,000-83,700 तक जा सकता है। अगर निफ्टी 26,000 से ऊपर बंद होता है तो वह 26,075-26,100 की तरफ बढ़ सकता है। सेंसेक्स 84,500 के ऊपर बंद होने पर 84,800-85,000 तक जा सकता है।

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अमेरिका ने टैरिफ बढ़ाया तो ग्रोथ पर भी पड़ सकता है असर

आनंद राठी ग्लोबल फाइनेंस के हरसिमरन साहनी ने कहा कि इंडिया के असर सिर्फ ट्रेड में अड़चन तक सीमित रहने वाला नहीं है। इसका असर इकोनॉमी पर भी पड़ सकता है। ज्यादा टैरिफ की वजह से ग्रोथ सुस्त पड़ सकती है। एनर्जी की कीमतें बढ़ने से इनफ्लेशन को काबू में करना मुश्किल हो जाएगा। इससे सरकार को घरेलू मार्केट में सप्लाई और डिमांड के बीच संतुलन बैठाने की कोशिश करनी पड़ेगी। इसका असर लिक्विडिटी पर पड़ेगा। सरकार को ज्यादा कर्ज लेने की जरूरत पड़ सकती है।

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