निलेश शाह ने कहा-2026 में स्मॉलकैप के मुकाबले मिडकैप और लार्जकैप का प्रदर्शन बेहतर रहेगा

कोटक एएमसी के एमडी निलेश शाह ने कहा कि 2026 में रिफॉर्म्स पर सरकार का फोकस जारी रहेगा। सरकार ऐसे रिफॉर्म्स कर रही है, जिससे पैसे कंज्यूमर्स की जेब में जाए। इससे डिमांड बढ़ेगी। इससे ग्रोथ को बढ़ावा मिलेगा। पहले ग्रोथ 5-7 फीसदी के बीच होती थी। रिफॉर्म्स के बाद यह बढ़कर 6-8 फीसदी हो गई है

अपडेटेड Dec 30, 2025 पर 8:27 PM
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निलेश शाह ने कहा कि सोने को लेकर आउटलुक पॉजिटिव लगता है, क्योंकि दुनिया में कई देशों के केंद्रीय बैंक गोल्ड खरीद रहे हैं।

कोटक एएमसी के एमडी निलेश शाह का मानना है कि यूनियन बजट 2026 में सरकार का फोकस अपनी वित्तीय स्थिति को ठीक करने पर बना रहेगा। बजट में एसेट मॉनेटाइजेशन और विनिवेश पर भी जोर होगा। शाह ने मनीकंट्रोल की श्वेता पुंज के साथ बातचीत में इनवेस्टमेंट और स्टॉक मार्केट्स सहित कई मसलों पर व्यापक चर्चा की। उन्होंने इंडियन मार्केट में विदेशी फंडों की बिकवाली की वजह भी बताई। शाह पीएम इकोनॉमिक एडवायजरी काउंसिल के मेंबर भी हैं।

सरकार का रिफॉर्म्स अगले साल जारी रहेगा

उन्होंने कहा कि 2026 में रिफॉर्म्स पर सरकार का फोकस जारी रहेगा। सरकार ऐसे रिफॉर्म्स कर रही है, जिससे पैसे कंज्यूमर्स की जेब में जाए। इससे डिमांड बढ़ेगी। इससे ग्रोथ को बढ़ावा मिलेगा। पहले ग्रोथ 5-7 फीसदी के बीच होती थी। रिफॉर्म्स के बाद यह बढ़कर 6-8 फीसदी हो गई है। उन्होंने कहा कि बजट में सरकार का फोकस अपनी वित्तीय स्थिति को ठीक करने पर होगा। सरकार कर्ज और जीडीपी रेशियो को 56 फीसदी से घटाकर 50 फीसदी पर लाना चाहती है।


यूनियन बजट में विनिवेश पर होगा फोकस

शाह ने कहा कि सरकार को बजट में सरकार एसेट मॉनेटाइजेशन और विनिवेश के बारे में सोचना चाहिए। हमें कोल माइनिंग में विनिवेश करना होगा ताकि हम लिथियम माइंस खरीद सकें। हमें होटल्स में विनिवेश करना होगा ताकि हम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और क्वांटम कंप्यूटिंग में निवेश कर सकें। हमें ऐसी स्थिति बनानी पड़ेगी जिसमें सरकार अपनी वित्तीय स्थिति को मजबूत बनाए रखते हुए कैपिटल एक्सपेंडिचर का बोझ उठा सके और भविष्य के लिए निवेश कर सके।

विदेश फंड्स दूसरे बाजारों में कर रहे निवेश

विदेशी फंडों की बिकवाली के बारे में उन्होंने कहा कि फॉरेन इनवेस्टर्स ने भारत में मोटी कमाई की है। अब वे कुछ प्राफिट ले जा रहे हैं। इसमें कुछ हाथ वैल्यूएशन का भी है। जब विदेशी फंडों ने भारत में बिकवाली शुरू की थी तब दूसरे देशों के मुकाबले हमारे मार्केट्स की वैल्यूएशंस ज्यादा थी। दूसरा, वे भारत से पैसे निकालकर दक्षिण कोरिया, ताइवान और जापान में निवेश कर रहे हैं। इन बाजारों का प्रदर्शन हमारे बाजारों से बेहतर रहा है।

सोने और चांदी का आउटलुक पॉजिटिव

इनवेस्टर्स को 2026 में किस तरह के रिटर्न की उम्मीद करनी चाहिए? इसके जवाब में उन्होंने कहा कि इनवेस्टर्स को एसेट ऐलोकेशन का ध्यान रखना चाहिए। सोने और चांदी को लेकर आउटलुक पॉजिटिव लगता है, क्योंकि दुनिया में कई देशों के केंद्रीय बैंक गोल्ड खरीद रहे हैं। चांदी का इंडस्ट्रियल इस्तेमाल बढ़ रहा है। लेकिन, सोने और चांदी में 2025 जैसी तेजी 2026 में जारी रहने की उम्मीद नहीं है। दोनों में उतार-चढ़ाव दिख सकता है। लेकिन, इनवेस्टर्स को अपने पोर्टफोलियो में इन्हें रखना चाहिए।

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2026 में स्मॉल, मिड और लार्जकैप का रिटर्न पॉजिटिव रहेगा

स्टॉक मार्केट्स के रिटर्न के बारे में उन्होंने कहा कि मिडकैप और लार्जकैप का प्रदर्शन स्मॉलकैप के मुकाबले बेहतर रह सकता है। इसकी वजह वैल्यूएशंस और अर्निंग्स ग्रोथ है। हालांकि, 2026 या FY27 में तीनों का रिटर्न पॉजिटिव रहेगा। लेकिन, इनवेस्टर्स को रिटर्न को लेकर अपनी उम्मीदों को नियंत्रण में रखने की जरूरत है। सोने-चांदी, शेयर और फिक्स्ड इनकम के रिटर्न की बात की जाए तो 2026 में यह औसत रह सकता है।

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