SEBI को सुप्रीम कोर्ट से तगड़ा झटका, NSE के 300 करोड़ लौटाने का निर्देश, समझें क्या है पूरा मामला

बाजार नियामक सेबी (SEBI) को आज सुप्रीम कोर्ट से तगड़ा झटका लगा है। कोर्ट ने एक मामले की सुनवाई में सेबी को आदेश दिया है कि वह एनएसई (NSE) को 300 करोड़ रुपये लौटाए जो उसने एसएटी के आदेश के तहत जमा किए थे। Supreme Court ने सिक्योरिटीज अपीलेट ट्रिब्यूनल (SAT) के आदेश पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है

अपडेटेड Mar 20, 2023 पर 3:35 PM
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एसएटी ने इस साल जनवरी में नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) को बड़ी राहत दी थी जब इसने सेबी के अप्रैल 2019 के एक आदेश को खारिज कर दिया है। अब सेबी को तो कोर्ट से झटका लगा ही है, इसके अलावा कोर्ट ने सेबी की याचिका पर एनएसई को भी नोटिस जारी किया है।

बाजार नियामक सेबी (SEBI) को आज सुप्रीम कोर्ट से तगड़ा झटका लगा है। कोर्ट ने एक मामले की सुनवाई में सेबी को आदेश दिया है कि वह एनएसई (NSE) को 300 करोड़ रुपये लौटाए जो उसने एसएटी के आदेश के तहत जमा किए थे। Supreme Court ने सिक्योरिटीज अपीलेट ट्रिब्यूनल (SAT) के आदेश पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। एसएटी ने इस साल जनवरी में नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) को बड़ी राहत दी थी जब इसने सेबी के अप्रैल 2019 के एक आदेश को खारिज कर दिया है। अब सेबी को तो कोर्ट से झटका लगा ही है, इसके अलावा कोर्ट ने सेबी की याचिका पर एनएसई को भी नोटिस जारी किया है।

क्या है ये SEBI और NSE के बीच का यह पूरा मामला

यह पूरा मामला को-लोकेशन स्कैम से जुड़ा हुआ है। इस घोटाले के तहत कुछ ट्रेडर्स को एनएसई के डेटा तक अनुचित तरीके से फास्ट एक्सेस मिला और उन्होंने इसका जमकर फायदा उठाया। इसे लेकर सेबी ने 30 अप्रैल 2019 को एनएसई को आदेश दिया था कि वह अप्रैल 2014 से लेकर अब तक 12 फीसदी के सालाना ब्याज के साथ 624.89 करोड़ रुपये जमा करे। हालांकि इस मामले में एनएसई को जनवरी 2023 में एसएटी से बड़ी राहत मिली।


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सेबी के इस कदम की एसएटी ने की थी आलोचना

कोर्ट ने जांच की धीमी गति और रेगुलेटरी ऑर्डर्स के लिए बाजार नियामक को फटकारा है और सवाल किया कि क्या वह इतने समय से सो रहा था। जनवरी के अंत में एसएटी की जस्टिस तरुण अग्रवाल और जस्टिस एमटी जोशी की बेंच ने भी सेबी को आड़े हाथ लिया था और जांच में विफल रहने के लिए उसे फटकारा था। बेंच के मुताबिक जब एनएसई जैसे फर्स्ट-लेवल रेगुलेटर के खिलाफ गंभीर आरोप हों तो सेबी को ज्यादा सक्रिय होकर जांच करना चाहिए था।

बेंच ने कहा कि सेबी की चाल सुस्त बनी रही जब तक कि इससे जुड़े सवाल संसद में नहीं गूंजने लगे और तब इसकी नींद खुली और इसने जांच शुरू की। हालांकि यह भी सीमित ही रही। ट्रिब्यूनल बेंच यहीं नही रुका। उसने आगे कहा कि आरोपों की गंभीरता को देखते हुए सेबी को जांच एनएसई को सौंपने की बजाय खुद करनी चाहिए थी। बेंच ने इस पर आश्चर्य जताया कि कैसे सेबी ने एनएसई को अपने खिलाफ जांच करने का निर्देश दिया जो सीधे तौर पर लापरवाही भरे रवैये का उदाहरण है।

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