NSE Shares: साल 2020 से नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के शेयरों की वैल्यू में 3 गुना से ज्यादा उछाल आया है। विशेषज्ञों का मानना है कि आगे चलकर इस उछाल की रफ्तार धीमी हो सकती है। इसका कारण होगा सेबी की ओर से F&O सेगमेंट के लिए सख्त मानदंड लागू किए जाने पर डेरिवेटिव वॉल्यूम में संभावित गिरावट। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि चूंकि NSE का F&O सेगमेंट में बेहद ज्यादा दबदबा है, इसलिए वॉल्यूम में कोई भी गिरावट एक्सचेंज की वित्तीय स्थिति और फिर वैल्यूएशन को प्रभावित करेगी।
ट्रांजेक्शन चार्जेस, एक्सचेंज के रेवेन्यू का सबसे बड़ा स्रोत हैं। अप्रैल-जून 2024 तिमाही में ट्रांजेक्शन चार्जेस के रूप में NSE को 3,600 करोड़ रुपये से अधिक की आय हुई। एक प्रमुख घरेलू ब्रोकिंग फर्म के अधिकारी ने कहा, "अगर सेबी के कंसल्टेशन पेपर को लागू किया जाता है, तो एक्सचेंज के लिए F&O में भागीदारी कम हो जाएगी। इसलिए स्टॉक के उछाल की रफ्तार पिछले कुछ वर्षों की तरह तेज नहीं होगी।"
30 जुलाई को जारी हुआ था डिस्कशन पेपर
30 जुलाई को मार्केट रेगुलेटर (सेबी) ने एक डिस्कशन पेपर जारी किया, जिसमें बाजार की स्थिरता को बढ़ावा देने और छोटे निवेशकों की सुरक्षा के लिए सख्त डेरिवेटिव्स रेगुलेशंस का प्रस्ताव रखा गया। सुझावों में कॉन्ट्रैक्ट के आकार को 4 गुना तक बढ़ाना, ऑप्शंस प्रीमियम को एडवांस में कलेक्ट करना, वीकली कॉन्ट्रैक्ट्स की संख्या को कम करना जैसी कई चीजें शामिल थीं।
एक्सचेंज के डेटा से पता चलता है कि जुलाई में NSE के शेयरों की एवरेज कीमत 4282 रुपये रही। यह जुलाई 2020 में देखी गई लगभग 1000 रुपये की एवरेज कीमत से बहुत अधिक है। जुलाई महीने में शेयर की कीमतों में मामूली गिरावट आई थी। जुलाई के पहले कुछ दिनों में शेयर 3900 रुपये के आसपास कारोबार कर रहे थे, जबकि 10 जुलाई को कारोबार 3728 रुपये के आसपास हुआ। हालांकि, कंसल्टेशन पेपर जारी होने के बाद शेयर की कीमत में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ।
रेवेन्यू में आ सकती है थोड़ी कमी
ब्रोकिंग उद्योग से जुड़े एक अन्य व्यक्ति ने कहा, "चूंकि NSE अपना अधिकांश कारोबार, डेरिवेटिव्स से हासिल करता है, इसलिए रेवेन्यू के मामले में NSE पर कुछ कमी आ सकती है।" NSE का अप्रैल-जून 2024 तिमाही में कंसोलिडेटेड शुद्ध मुनाफा सालाना आधार पर 39 प्रतिशत बढ़कर 2,567 करोड़ रुपये हो गया। जून 2024 तिमाही में ऑपरेशंस से कंसोलिडेटेड रेवेन्यू सालाना आधार पर 51 प्रतिशत बढ़कर 4510 करोड़ रुपये रहा।