Oil Stocks: तीन साल से अधिक समय का हाई छूने के बाद जब कच्चा तेल फिसला तो अपने साथ यह तेल निकालने वाली यानी ऑयल एक्स्प्लोरेशन कंपनियों के शेयरों को भी लेकर नीचे आ गया। कच्चा तेल एक दिन पहले प्रति बैरल $120 के करीब पहुंच गया था तो अब आज यह $95 के भी नीचे आ गया। इसके चलते ओएनजीसी (ONGC) और ऑयल इंडिया (Oil India) के शेयरों को झटका लगा और इनमें करीब डेढ़ फीसदी की गिरावट आई। वहीं हिंदुस्तान ऑयल एक्स्प्लोरेशन कंपनी (Hindustan Oil Exploration Company) के शेयर तो करीब 7% और जिंदल ड्रिलिंग (Jindal Drilling) के शेयर 3% से अधिक टूट गए। ऑयल एंड गैस के निफ्टी इंडेक्स में करीब आधे फीसदी की गिरावट आई है।
क्या स्थिति है कच्चे तेल की?
एक कारोबारी दिन पहले कच्चा तेल इंट्रा-डे में $120 के काफी करीब पहुंच गया था। आज की बात करें तो ब्रेंट फ्यूचर्स $6.51 यानी 6.6% टूटकर प्रति बैरल $92.45 पर है तो यूएस वेस्ट टेक्सस इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड भी $6.12 यानी 6.5% गिरकर $88.65 पर आ गया है।
कच्चे तेल में क्यों है उठा-पटक?
अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच छिड़ी जंग के चलते वैश्विक सप्लाई में बड़ी दिक्कतों को देखते हुए सऊदी अरब समेत तेल निकालने वाले खाड़ी के अन्य देशों ने इसके उत्पादन में कटौती का फैसला किया तो कच्चा तेल रॉकेट बन गया। सोमवार को यह प्रति बैरल $100 के पार चला गया। इंट्रा-डे में बात करें तो ब्रेंट क्रूड $119.50 और डब्ल्यूटीआई $119.48 के हाई तक पहुंच गया था। हालांकि फिर जब रुस के राष्ट्रपति व्लादीमिर पुतिन ने ट्रंप से बात की और ईरान से चल रहे युद्ध के जल्द समाधान से जुड़े प्रस्ताव पेश किए तो सप्लाई में लंबे समय तक रुकावट की आशंका कम हुई और कच्चा तेल फिसल गया।
साथ ही सोमवार को सीबीएस न्यूज के साथ एक इंटरव्यू में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि उन्हें लगता है कि ईरान के खिलाफ युद्ध पूरी तरह समाप्त हो चुका है और अमेरिका उनके शुरुआती चार से पांच सप्ताह के अनुमानित समय से काफी आगे है। इससे कच्चे तेल में नरमी को सपोर्ट मिला।
वहीं ट्रंप के जवाब में ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (आईआरजीसी) ने कहा कि युद्ध का अंत वह तय करेंगे और अगर अमेरिका-इजरायल के हमले जारी रहे तो ईरान एक लीटर तेल का भी निर्यात नहीं होने देगा। ईरान की मीडिया ने मंगलवार को आईआरजीसी के प्रवक्ता के हवाले से यह जानकारी दी। हालांकि इससे कच्चे तेल में कोई उबाल नहीं आ पाया क्योंकि ट्रंप वैश्विक तेल की बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने के लिए रूस पर तेल प्रतिबंधों में ढील देने और कच्चे तेल के आपातकालीन भंडार को खोलने पर विचार कर रहे हैं।