Crude Oil: मिडिल ईस्ट में शांति की उम्मीदों पर पानी फिरने के बाद कच्चे तेल की कीमतों ने एक बार फिर करवट ली है। गुरुवार, 26 मार्च को तेल की कीमतों में 1% से ज्यादा का उछाल देखा गया, जिससे ब्रेंट क्रूड $103 के ऊपर निकल गया। बाजार में यह तेजी ईरान के उस बयान के बाद आई है जिसमें उसने अमेरिका के साथ किसी भी तरह की 'सीधी बातचीत' से इनकार किया है।
कच्चे तेल की कीमतों में उछाल
अमेरिका और ईरान के बीच विरोधाभासी बयानों ने निवेशकों को उलझन में डाल दिया है, जिससे मार्केट में उतार-चढ़ाव बढ़ गया है। ब्रेंट क्रूड का ग्लोबल बेंचमार्क 1.21% चढ़कर $103.46 प्रति बैरल पर पहुंच गया। अमेरिकी कच्चा तेल (WTI) 1.35% की बढ़त के साथ $91.54 प्रति बैरल पर ट्रेड कर रहा है। पिछले कुछ दिनों में तेल की कीमतों में भारी उठापटक देखी गई है। जहां मंगलवार को कीमतें 7% गिरी थीं, वहीं आज फिर इनमें तेजी लौट आई है।
ईरान का सीधी बातचीत से इनकार
ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने उन खबरों का खंडन किया है जिनमें अमेरिका के साथ सीधी बातचीत का दावा किया गया था। ईरान का कहना है कि पाकिस्तान, मिस्र और अन्य मध्यस्थों के जरिए संदेशों का आदान-प्रदान जरूर हो रहा है, लेकिन इसे 'अमेरिका के साथ सीधी बातचीत' नहीं कहा जा सकता।
अराघची ने पुराने अनुभवों का हवाला देते हुए कहा कि पहले भी बातचीत के दौरान अमेरिका ने हमले किए थे, इसलिए फिलहाल सीधी बातचीत एजेंडे में नहीं है। ईरानी मीडिया के अनुसार, तेहरान अमेरिका के 15-सूत्रीय शांति प्रस्ताव को ठुकरा दिया है और अपनी 5 शर्तें सामने रखा है।
ट्रंप का दावा: 'बातचीत जारी हैं'
ईरान के रुख के उलट, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ओवल ऑफिस से पॉजिटिव संकेत दिए हैं। ट्रंप ने बुधवार को कहा था कि अमेरिका और ईरान के बीच 'प्रोग्रेसिव' बातचीत चल रही है। उन्होंने यहां तक कहा कि 'ईरान बहुत बुरी तरह डील करना चाहते हैं।' ट्रंप ने फिलहाल ईरानी ऊर्जा ठिकानों पर हमलों को 5 दिनों के लिए रोक दिया है ताकि कूटनीति को मौका मिल सके।
अनिश्चितता के बीच जारी है उठापटक
वाशिंगटन और तेहरान के अलग-अलग बयानों ने मार्केट सेंटीमेंट को प्रभावित किया है। होर्मुज जलडमरूमध्य से वैश्विक तेल का करीब 20% हिस्सा गुजरता है। इसकी सुरक्षा को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। यही वजह है कि तेल की कीमतें आसमान छू रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक युद्धविराम की शर्तों पर दोनों पक्ष एक मत नहीं होते, तेल की कीमतों में यह 'उठापटक' जारी रहेगा।