इलेक्ट्रिक स्कूटर कंपनी ओला इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के शेयरों में 1 अप्रैल को दिन में 16 प्रतिशत तक की बढ़त दर्ज की गई। BSE पर शेयर 26.50 रुपये के हाई तक गए। बाद में शेयर 13.6 प्रतिशत बढ़त के साथ 25.93 रुपये पर सेटल हुआ। मार्च में कंपनी के बिजनेस की परफॉरमेंस अच्छी रहने से इस शेयर में निवेशकों के भरोसे को बल मिला। कंपनी ने मार्च 2026 के आखिरी हफ्ते में रोजाना 1,000 यूनिट के ऑर्डर दर्ज किए। सरकारी पोर्टल VAHAN के अनुसार, मार्च महीने में कंपनी के इलेक्ट्रिक स्कूटरों के रजिस्ट्रेशन बढ़कर 10,117 यूनिट पर पहुंच गए। यह फरवरी के 3,973 यूनिट्स के रजिस्ट्रेशन के मुकाबले 150 प्रतिशत ज्यादा है।
पिछले कुछ महीनों में सर्विस से जुड़ी चुनौतियों का सामना करने के बाद, ओला इलेक्ट्रिक ने अपने ऑपरेशंस में बड़े बदलाव किए हैं। इसके चलते सर्विस में लगने वाला समय (टर्नअराउंड टाइम) और कस्टमर अनुभव काफी बेहतर हुआ है। इससे कस्टमर्स का भरोसा बढ़ा है और मांग में तेजी आई है। ओला इलेक्ट्रिक के सर्विस ऑपरेशंस में बड़ा बदलाव हुआ है। अब 80 प्रतिशत से ज्यादा गाड़ियों की सर्विस उसी दिन हो जाती है। यह पार्ट्स की बेहतर उपलब्धता, खराबी का तेजी से पता लगाने (डायग्नोस्टिक्स) और पूरे नेटवर्क में बेहतर ऑपरेशनल कंट्रोल की वजह से मुमकिन हो पाया है।
Ola Electric के प्रवक्ता ने बयान में कहा, “हम मांग में एक स्पष्ट बदलाव देख रहे हैं। मार्च महीने के दौरान रोजाना के ऑर्डर लगातार बढ़ रहे थे, और आखिरी हफ्तों में उनमें काफी तेजी आई। इस तेजी का मुख्य कारण हमारे सर्विस ऑपरेशंस में किए गए ढांचागत सुधार हैं। इनकी वजह से अब काम पूरा होने में कम समय लग रहा है और ग्राहकों को पहले से कहीं बेहतर अनुभव मिल रहा है। जैसे-जैसे ग्राहकों का भरोसा बढ़ रहा है, हम अपने पूरे पोर्टफोलियो में बिक्री में मजबूत बढ़त देख रहे हैं। इससे हमें यह विश्वास मिला है कि यह रिकवरी आगे भी जारी रहेगी और इसका विस्तार होगा।”
Ola Electric शेयर की कीमत 6 महीनों में हुई आधी
कंपनी का मार्केट कैप 11400 करोड़ रुपये से ज्यादा हो गया है। शेयर की फेस वैल्यू 10 रुपये है। शेयर 6 महीनों में 54 प्रतिशत गिरा है। कंपनी में दिसंबर 2025 के आखिर तक प्रमोटर्स के पास 34.59 प्रतिशत हिस्सेदारी थी। शेयर का BSE पर 52 सप्ताह का एडजस्टेड हाई 71.24 रुपये और एडजस्टेड लो 21.21 रुपये है।
ओला इलेक्ट्रिक का अक्टूबर-दिसंबर 2025 तिमाही में कुल ऑपरेशनल रेवेन्यू 470 करोड़ रुपये रहा। कंपनी ने कुल 32,680 यूनिट्स की डिलीवरी की। इस बीच कंपनी ने 34.3 प्रतिशत का रिकॉर्ड कंसोलिडेटेड ग्रॉस मार्जिन हासिल किया।
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