Pajson Agro IPO Listing: 5% प्रीमियम पर लिस्ट हुआ ₹118 का शेयर, नई एंट्री से पहले चेक करें काजू कंपनी की सेहत

Pajson Agro IPO Listing: पाजसोन एग्रो इंडिया कच्चे काजू को प्रोसेस कर इससे काजू गिरी बनाती है और फिर इन्हें देशी-विदेशी बाजारों में सप्लाई करती है। अब इसके शेयर लिस्ट हुए हैं। इसके आईपीओ के तहत सिर्फ नए शेयर जारी हुए हैं। चेक करें कंपनी की कारोबारी सेहत कैसी है और आईपीओ के जरिए जुटाए गए पैसों का इस्तेमाल कंपनी कैसे करेगी?

अपडेटेड Dec 18, 2025 पर 4:25 PM
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Pajson Agro IPO Listing: पाजसोन एग्रो का ₹74.45 करोड़ का आईपीओ सब्सक्रिप्शन के लिए 11-15 दिसंबर तक खुला था। आज इसके शेयरों की लिस्टिंग हुई है।

Pajson Agro IPO Listing: काजू की प्रोसेसिंग कंपनी पाजसोन एग्रो इंडिया की आज BSE SME प्लेटफॉर्म पर धांसू एंट्री हुई। इसके आईपीओ को ओवरऑल 6 गुना से अधिक बोली मिली थी। आईपीओ के तहत ₹118 के भाव पर शेयर जारी हुए हैं। आज BSE SME पर इसकी ₹124.00 पर एंट्री हुई है यानी कि आईपीओ निवेशकों को 5.08% का लिस्टिंग गेन (Pajson Agro Listing Gain) मिला। हालांकि आईपीओ निवेशकों की खुशी थोड़ी ही देर में फीकी हो गई जब शेयर टूट गए। टूटकर यह ₹120.05 (Pajson Agro Share Price)  पर आ गया। हालांकि निचले स्तर पर इसने रिकवरी की और उछलकर यह ₹130.20 के अपर सर्किट पर पहुंच गया और इसी पर यह बंद भी हुआ यानी कि पहले कारोबारी दिन की समाप्ति पर आईपीओ निवेशक 10.34% मुनाफे में हैं।

Pajson Agro IPO के पैसे कैसे होंगे खर्च

पाजसोन एग्रो का ₹74.45 करोड़ का आईपीओ सब्सक्रिप्शन के लिए 11-15 दिसंबर तक खुला था। इस आईपीओ को निवेशकों का अच्छा रिस्पांस मिला था और ओवरऑल यह 6.50 गुना सब्सक्राइब हुआ था। इसमें क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB) के लिए आरक्षित हिस्सा 10.92 गुना (एक्स-एंकर), नॉन-इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स (NII) का हिस्सा 6.86 गुना और खुदरा निवेशकों का हिस्सा 3.85 गुना भरा था। इस आईपीओ के तहत ₹10 की फेस वैल्यू वाले 63,09,600 नए शेयर जारी हुए हैं। इन शेयरों के जरिए जुटाए गए पैसों में से ₹57.00 करोड़ आंध्र प्रदेश के विजियानांगरम में काजू की दूसरी प्रोसेसिंग फैसिलिटी के कैपिटल एक्सपेंडिचर और बाकी पैसे आम कॉरपोरेट उद्देश्यों पर खर्च होंगे।


Pajson Agro के बारे में

वर्ष 2021 में पाजसोन एग्रो इंडिया कच्चे काजू को प्रोसेस कर इससे काजू गिरी बनाती है और फिर इन्हें देशी-विदेशी बाजारों में सप्लाई करती है। कंपनी इसे खुदरा और थोक, दोनों तरह से अपने व्हाइट-लेबल ब्रांड 'रॉयल मेवा' (ड्राई फ्रूट्स सेगमेंट) के तहत बिक्री करती है। साथ ही यह इंडस्ट्रीज और खेतों के लिए काजू के छिलके और भूसी भी बेचती है। कंपनी का बिजनेस देश के 18 राज्यों और 3 यूनियन टेरिटरीज में फैला हुआ है। इसका कैश्यू यानी काजू प्रोसेसिंग प्लांट आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में है।

कंपनी के वित्तीय सेहत की बात करें तो यह लगातार मजबूत हुई है। वित्त वर्ष 2023 में इसे ₹2 लाख का शुद्ध मुनाफा हुआ था जो अगले वित्त वर्ष 2024 में रॉकेट की स्पीड से उछलकर ₹3.35 करोड़ और वित्त वर्ष 2025 में ₹20.42 करोड़ पर पहुंच गया। इस दौरान कंपनी की टोटल इनकम सालाना 36% से अधिक की चक्रवृद्धि दर (CAGR) से बढ़कर ₹187.28 करोड़ पर पहुंच गई। चालू वित्त वर्ष 2026 की बात करें तो पहली छमाही अप्रैल-सितंबर 2025 में कंपनी को ₹14.20 करोड़ का शुद्ध मुनाफा और ₹118.37 करोड़ की टोटल इनकम हासिल हो चुकी है। सितंबर 2025 तिमाही के आखिरी में कंपनी पर ₹40.04 करोड़ का टोटल कर्ज था जबकि रिजर्व और सरप्लस में ₹40.90 करोड़ पड़े थे।

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डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

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