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Paytm-Zomato डील दोनों कंपनियों के शेयरहोल्डर्स के लिए फायदेमंद है, फिर क्यों गिरे शेयर्स?

पेटीएम और जोमैटो दोनों दिल्ली-एनसीआर की कंपनियां हैं। लेकिन दोनों का कारोबारी सफर एक जैसा नहीं रहा है। जोमैटो ने ब्लिंकिट का अधिग्रहण किया। इससे कंपनी का कोराबार तेजी से बढ़ा है।आज इसके पास व्यापक कस्टमर्स नेटवर्क है। उधर, पेटीएम एक के बाद मुश्किल में फंसती चली गई है

MoneyControl Newsअपडेटेड Aug 22, 2024 पर 4:36 PM
Paytm-Zomato डील दोनों कंपनियों के शेयरहोल्डर्स के लिए फायदेमंद है, फिर क्यों गिरे शेयर्स?
पेटीएम जब कभी क्रेडिट डिस्बर्सल या मर्चेंट सब्सक्रिप्शन डिवाइस में आगे बढ़ती नजर आती है, इसे किसी तरह का झटका लग जाता है।

जोमैटो और पेटीएम के बीच एंटरटेनमेंट टिकटिंग बिजनेस की डील के बाद भी दोनों में से प्रत्येक के पास 10,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का कैश बचेगा। हालांकि, दिल्ली और एनसीआर के इन दिनों यूनिकॉर्न का सफर पिछले कुछ सालों में एक जैसा नहीं रहा है। जोमैटो अपने बिजनेस को लेकर लोगों का भरोसा हासिल करने में सफल रही है। लेकिन, पेटीएम ऐसा करने में नाकाम रही है। इसके उलट पेटीएम को कुछ बिजनेसेज को बंद करने को मजबूर होना पड़ा है।

मार्केट का भरोसा हासिल करने में कामयाब रही है जोमैटो

जोमैटो (Zomato) जब स्टॉक एक्सचेंज में लिस्ट हुई थी, तब इसका फोकस फूड डिलिवरी बिजनेस पर था। बाद में कारोबार कमजोर पड़ने पर इसने ब्लिंकिट (Blinkit) का अधिग्रहण किया। अब मार्केट को यह भरोसा हो गया है कि जोमैटो का अधिग्रहण का फैसला सही था। इसका असर जोमैटो के शेयरों पर दिखा है। शेयरों में अच्छी तेजी आई है। इसके उलट, पेटीएम के शेयरों की लिस्टिंग कमजोरी के साथ हुई। तब से इसके शेयरों के प्राइस गिर रहे हैं।

नॉन-कोर बिजनेस को बेचना पेटीएम के लिए फायदेमंद

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