फार्मा शेयरों पर नहीं दिखा शेयर बाजार में बड़ी गिरावट का असर, डॉ रेड्डीज 9% उछला

नोमुरा ने कहा है कि मार्च में इंडिया में फार्मा मार्केट की ग्रोथ साल दर साल आधार पर 10.1 फीसदी रही। ब्रोकरेज फर्म ने कहा है कि कई फार्मा कंपनियों की ग्रोथ मार्च तिमाही में उम्मीद से बेहतर रही। इससे ज्यादातर फार्मा कंपनियों के शेयरों में तेजी दिखी

अपडेटेड Apr 23, 2026 पर 5:03 PM
  • Follow Us On Google
  • Add as a Preferred Source on Google
सेमाग्लूटाइड को एप्रूवल मिलने की उम्मीद में डॉ रेड्डीज के शेयरों में जबर्दस्त तेजी देखने को मिली।

शेयर बाजार में बड़ी गिरावट का असर फार्मा शेयरों पर नहीं दिखा। 23 अप्रैल को सन फार्मा, डिवीज लैब, टोरेंट फार्मास्युटिकल्स, ल्यूपिन सहित दिग्गज फार्मा कंपनियों के शेयरों में तेजी रही। इससे निफ्टी फार्मा इंडेक्स में 2.36 फीसदी उछाल दिखा। नोमुरा ने कहा है कि मार्च में इंडिया में फार्मा मार्केट की ग्रोथ साल दर साल आधार पर 10.1 फीसदी रही। ब्रोकरेज फर्म ने कहा है कि कई फार्मा कंपनियों की ग्रोथ मार्च तिमाही में उम्मीद से बेहतर रही।

डॉ रेड्डीज के शेयरों में सबसे ज्यादा तेजी

23 अप्रैल को सन फार्मा का शेयर 0.62 फीसदी, डिवीज लैब का शेयर 1.48 फीसदी, टोरेंट फार्मा का शेयर 1.53 फीसदी, ल्यूपिन का शेयर 1.45 फीसदी, डॉ रेड्डीज का शेयर 9.37 फीसदी, सिप्ला का शेयर 5.63 फीसदी, जायडस का शेयर 1.77 फीसदी और मैनकाइंड फार्मा का शेयर 2.59 फीसदी चढ़ा। सीएनबीसी-टीवी18 ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि डॉ रेड्डीज को अभी कनाडा में सेमाग्लूटाइड के एप्रूवल का इंतजार है।


सेमाग्लूटाइड को एप्रूवल की उम्मीद में चढ़ा शेयर

सेमाग्लूटाइड को एप्रूवल मिलने की उम्मीद में डॉ रेड्डीज के शेयरों में जबर्दस्त तेजी देखने को मिली। एक समय शेयर 10 फीसदी तक चढ़ गया था। यह मई 2022 के बाद से किसी एक दिन में शेयर आई सबसे बड़ी तेजी थी। तीसरी तिमाही के नतीजों के बाद कंपनी के मैनेजमेंट ने कहा था कि उसे मई 2026 तक कनाडा में सेमाग्लूटाइड को मंजूरी मिल जाने की उम्मीद है। कंपनी ने कहा था कि कंपनी FY26 की चौथी तिमाही या FY27 की पहली तिमाही में दवा लॉन्च करने की तैयारी कर रही है।

फार्मा कंपनियों को रुपये में कमजोरी से फायदा

Elara Securities ने कहा है कि बीते 3-4 महीनों में दुनिया की बड़ी करेंसीज के मुकाबले रुपये में कमजोरी आई है। यह भारतीय फार्मा कंपनियों के लिए अच्छी खबर है। कई भारतीय कंपनियों के रेवेन्यू में विदेशी बाजार की बड़ी हिस्सेदारी है। कुछ कंपनियों की विदेश में सब्सिडियरी कंपनियां हैं। भारतीय फार्मा कंपनियां रुपये में अपने नतीजों का एलान करती है। इसलिए डॉलर के मुकाबले रुपये में कमजोरी का इन कंपनियों के प्रॉफिट पर अच्छा असर पड़ेगा।

विदेशी बाजार में मौजूदगी वाली कंपनियों को ज्यादा लाभ

ब्रोकरेज फर्म ने अपनी रिपोर्ट में कहा है, "जिन फार्मा कंपनियों के रेवेन्यू में विदेशी बाजार की बड़ी हिस्सेदारी है, उनके मार्जिन पर करेंसी में कमजोरी का पॉजिटिव असर दिख सकता है। जिन कंपनियों के रेवेन्यू में विदेशी बाजार की सीमित हिस्सेदारी है उनके मार्जिन पर दबाव दिख सकता है। इसकी वजह हायर इनपुट और ऑपरेटिंग कॉस्ट है।" उसने कहा है कि रुपये में कमजोरी से FY27 में कंपनियों के रेवेन्यू पर 5 फीसदी तक का पॉजिटिव असर दिख सकता है। EBITDA पर 15 फीसदी तक का पॉजिटिव असर दिख सकता है।

हिंदी में शेयर बाजार स्टॉक मार्केट न्यूज़,  बिजनेस न्यूज़,  पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App  डाउनलोड करें।