नुवामा इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज (Nuvama Institutional Equities) के अभिलाष पगारिया (Abhilash Pagaria) ने एक रिपोर्ट में कहा है कि अगर वे अपने मौजूदा मूल्य स्तर को बनाए रखते हैं तो कम से कम चार स्टॉक एमएससीआई ग्लोबल स्टैंडर्ड इंडेक्स (MSCI Global Standard Index) में प्रवेश पा लेंगे। इसके चलते इंडेक्स में आए बदलाव के बाद इन स्टॉक्स में कुल 56.7 करोड़ डॉलर का विदेशी निवेश आएगा। चार स्टॉक हैं बीएचईएल ( 13.8 करोड़ डॉलर का विदेशी निवेश आने की उम्मीद), पंजाब नेशनल बैंक (14.2 करोड़ डॉलर विदेशी निवेश आने की उम्मीद), जिंदल स्टेनलेस ( 14.9 कारोड़ का विदेशी निवेश आने की उम्मीद) और ओबेरॉय रियल्टी ( 13.8 करोड़ डॉलर का विदेशी निवेश आने की उम्मीद)।
सूचकांक में बदलाव की आधिकारिक घोषणा 12 फरवरी को होनी है, जिसमें एडजस्टमेंट 29 फरवरी को होगा। शेयरों के चुनाव के लिए ग्लोबल कट-ऑफ पीरियड 18-31 जनवरी तक है। पगारिया को उम्मीद है कि स्टॉक सेलेक्शन कट-ऑफ पीरियड के शुरुआती कुछ दिनों में ही हो जाएगा। कुछ स्टॉक अपने मौजूदा स्तर से 5-10 फीसदी ऊपर जाने पर इस इंडेक्स में शामिल किये जा सकते हैं। इसलिए निवेशकों को भी उन्हें अपने रडार पर रखना चाहिए। ये स्टॉक हैं डालमिया भारत, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, अल्केम लैब्स, सोलर इंडस्ट्रीज और नायका।
नुवामा का कहना है कि अगर इंद्रप्रस्थ गैस और पेट्रोनेट एलएनजी में मौजूदा स्तर से और गिरावट आती है तो उन्हें इस इंडेक्स से बाहर किया जा सकता है। 2023 में, पिछले चार रिवीजनों में कुल 17 भारतीय शेयरों को शामिल करने के साथ ही एमएससीआई ग्लोबल स्टैंडर्ड इंडेक्स में भारत के स्टॉक की संख्या बढ़कर 131 हो गई है। बता दें कि 2022 में इस इंडेक्स में भारत के केवल 9 शेयर शामिल किए गए थे। 2023 में हुई इस बढ़त में दूसरे उभरते बाजारों की तुलना में भारत के बाजार की तेजी और स्टॉक शामिल/बाहर करने के लिए एमएससीआई द्वारा छमाही की जगह तिमाही रिबैलेंसिंग नीति की अपनाने का योगदान है।
8 दिसंबर तक, MSCI इमर्जिंग मार्केट इंडेक्स (MSCI का एक दूसरा इंडेक्स) में भारत की हिस्सेदारी 16.9 फीसदी है। पगारिया ने कहा, “भारत के मौजूदा मोमेंटम और दूसरे उभरते बाजारों की तुलना में इसके बेहतर प्रदर्शन के देखते हुए अनुमान है कि भारत का इंडेक्स प्रेजेंटेशन 2024 की शुरुआत से मध्य तक 20 फीसदी को पार कर सकता है।”