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Polycab India Share Price: नतीजों के बाद 6% भागा शेयर, HSBC ने बढ़ाया टारगेट प्राइस, क्या आपने भी कर रखा है निवेश

Polycab India Share Price: HSBC ने कहा कि वायर और केबल में इसके एग्जीक्यूशन-ड्रिवन मार्केट शेयर में बढ़त और FMEG मार्जिन में बढ़ोतरी से फाइनेंशियल ईयर 2026-2029 में पॉलीकैब के लिए अनुमानित 20% अर्निंग्स पर शेयर (EPS) कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) बढ़ने की उम्मीद है

Sujata Yadavअपडेटेड May 07, 2026 पर 12:21 PM
Polycab India Share Price: नतीजों के बाद 6% भागा शेयर, HSBC ने बढ़ाया टारगेट प्राइस, क्या आपने भी कर रखा है निवेश
ब्रोकरेज ने कहा कि उसे अच्छा लगा कि कंपनी की घरेलू डिमांड मज़बूत बनी रही, जिसकी वजह लगातार सरकारी कैपेक्स, प्राइवेट कैपेक्स में बढ़ोतरी और घरों की स्थिर डिमांड रही।

Polycab India Share Price: केबल इंडस्ट्रीज की दिग्गज पॉलीकैब इंडिया ( Polycab (India) Ltd. ) के शेयर गुरुवार को 6% बढ़कर 8,938.70 रुपये पर पहुंच गए। वायर और केबल बनाने वाली इस कंपनी ने लगभग हर पैमाने पर स्ट्रीट के अनुमानों से बेहतर तिमाही नतीजे दिए, जिससे ब्रोकरेज ने टारगेट प्राइस को अपग्रेड कर इसके टारगेट प्राइस में बढ़ोतरी की है। यहीं वजह रही है कि आज शेयर में जोरदार उछाल देखने को मिल रहा है।

यह तेजी पॉलीकैब के Q4 कंसोलिडेटेड रेवेन्यू में साल-दर-साल 27% की बढ़ोतरी के बाद आई है, जबकि EBITDA में 13% की बढ़ोतरी हुई है। जियोपॉलिटिकल दिक्कतों, मार्च में डिमांड में कमी और कच्चे माल के उतार-चढ़ाव के बीच चैनल डीस्टॉकिंग के बावजूद इन नंबरों ने एनालिस्ट को इम्प्रेस किया है।

HSBC ने पॉलीकैब पर अपनी "Buy" रेटिंग बनाए रखी है और अपना प्राइस टारगेट पिछले ₹8,500 प्रति शेयर से बढ़ाकर ₹9,500 प्रति शेयर कर दिया है। यह इसके पिछले क्लोजिंग प्राइस से 12.9% की बढ़त दिखाता है। ब्रोकरेज ने कहा कि चौथी तिमाही में पॉलीकैब की रेवेन्यू ग्रोथ रियलाइज़ेशन पर आधारित थी, जबकि इसके प्रोडक्ट मिक्स और ज़्यादा लागत ने प्रॉफिटेबिलिटी पर असर डाला।

HSBC ने कहा कि वायर और केबल में इसके एग्जीक्यूशन-ड्रिवन मार्केट शेयर में बढ़त और FMEG मार्जिन में बढ़ोतरी से फाइनेंशियल ईयर 2026-2029 में पॉलीकैब के लिए अनुमानित 20% अर्निंग्स पर शेयर (EPS) कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) बढ़ने की उम्मीद है। ब्रोकरेज ने कहा कि उसे अच्छा लगा कि कंपनी की घरेलू डिमांड मज़बूत बनी रही, जिसकी वजह लगातार सरकारी कैपेक्स, प्राइवेट कैपेक्स में बढ़ोतरी और घरों की स्थिर डिमांड रही।

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