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FII निवेश में संभावित मंदी और महंगा वैल्यूशन बाजार की तेजी पर लगा सकता है लगाम : वरुण लोहचब

Daily Voice : सीमेंट और खपत जैसे कमोडिटी से जुड़े सेक्टर्स के लिए भी जोखिम नजर आ रहा है। इन सेक्टर की कंपनियों की प्राइसिंग पावर में कोई खास मजबूती देखने को नहीं मिली है। ब्रेंट क्रूड पहले ही 80 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर चला गया है, इसका मतलब यह है कि महंगाई फिर से बढ़ रही है। ऐसी स्थिति में प्रोडक्ट की कीमत बढ़ाए बिना कमोडिटी की खपत करने वाले कंपनियों के लिए इनपुट लागत में बढ़त को सहन करना मुश्किल होगा। ऐसे में उनके ऑपरेटिंग मार्जिन पर दबाव देखने को मिलेगा

Curated By: Sudhanshu Dubeyअपडेटेड Jul 28, 2023 पर 8:53 PM
FII निवेश में संभावित मंदी और महंगा वैल्यूशन बाजार की तेजी पर लगा सकता है लगाम : वरुण लोहचब
Daily Voice : वरुण लोहचब का मानना है कि विदेशी निवेशकों की तरफ से आ रहे निवेश में मंदी और महंगे वैल्यूशन के चलते बाजार वर्तमान स्तरों से आने वाली तेजी को ब्रेक लग सकता है

Daily Voice : हमारे बाजार का वैल्यूएशन काफी महंगा नजर आ रहा है। पहली तिमाही के नतीजों के सीजन में अब तक आए कंपनियों के नतीजे काफी हद तक अनुमान के मुताबिक ही रहे हैं। कुछ भी ऐसा शानदार नहीं हुआ है जो मौजूदा वैल्यूएशन को सही ठहरा सके। ये बातें मनीकंट्रोल के साथ एक साक्षात्कार में एचडीएफसी सिक्योरिटीज में इंस्टीट्यूशनल रिसर्च के हेड वरुण लोहचब ने कही हैं। उनका मानना है कि विदेशी निवेशकों की तरफ से आ रहे निवेश में मंदी और महंगे वैल्यूशन के चलते बाजार वर्तमान स्तरों से आने वाली तेजी को ब्रेक लग सकता है।

बैंकिंग सेक्टर में अच्छी ग्रोथ की उम्मीद

भारती इक्विटी मार्केट का 18 साल का अनुभव रखने वाले वरुण लोहचब की राय है कि आगे बैंकिंग सेक्टर में अच्छी ग्रोथ देखने को मिलेगी। हालांकि इस ग्रोथ में NIM (Net Interest Margin)में संकुचन देखने को मिलेगा। ऐसे में भविष्य में इस सेक्टर में होने वाली आय और मिलने वाला रिटर्न मध्म स्तर के ही रहेंगे।

क्या आपको चालू तिमाही नतीजों के मौसम में किसी सेक्टर को लिए कोई खास जोखिम नजर आ रहा है? इसका जवाब देते हुए वरुण ने कहा कि वर्तमान नतीजों के मौसम में हमें अधिकांश बैंकों के एनआईएम (नेट इंटरेस्ट मार्जिन) पर स्पष्ट दबाव देखने को मिला है। हालांकि वित्त वर्ष 2024 में अधिकांश बैंकों के एनआईएम मे 50 बीपीएस संकुचन की उम्मीद है। लेकिन डिपॉजिट में आने वाली किसी कमी के कारण अगर एनआईएम में और गिरावट होती है तो बैंकिंग से सेक्टर के लिए जोखिम हो सकता है।

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