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मार्जिन और एसेट क्वॉलिटी में गिरावट की वजह से प्राइवेट बैंकों के लिए काफी मुश्किल भरा रहा जून क्वॉर्टर

वित्त वर्ष 2025 की पहली तिमाही में प्राइवेट बैंकों को मार्जिन में कमी, एसेट क्वॉलिटी में गिरावट और एनपीए आदि मुश्किलों का बढ़ोतरी का सामना करना पड़ा। जून 2024 तिमाही के दौरान सीजनल चुनौतियों की वजह से प्राइवेट सेक्टर के बैंकों की परफॉर्मेंस में सुस्ती रही। निजी बैंकों ने नतीजों के बाद मीडिया से बातचीत में इस बात को स्वीकार भी किया है

MoneyControl Newsअपडेटेड Jul 29, 2024 पर 6:26 PM
मार्जिन और एसेट क्वॉलिटी में गिरावट की वजह से प्राइवेट बैंकों के लिए काफी मुश्किल भरा रहा जून क्वॉर्टर
जून तिमाही में एसेट क्वॉलिटी के मोर्चे पर भी पिछली तिमाही के मुकाबले प्राइवेट बैंकों पर दबाव दिखा।

वित्त वर्ष 2025 की पहली तिमाही में प्राइवेट बैंकों को मार्जिन में कमी, एसेट क्वॉलिटी में गिरावट और एनपीए आदि मुश्किलों का बढ़ोतरी का सामना करना पड़ा। जून 2024 तिमाही के दौरान सीजनल चुनौतियों की वजह से प्राइवेट सेक्टर के बैंकों की परफॉर्मेंस में सुस्ती रही। निजी बैंकों ने नतीजों के बाद मीडिया से बातचीत में इस बात को स्वीकार भी किया है। इसके अलावा, एसेट क्वॉलिटी में गिरावट की वजह से इन बैंकों की प्रोविजिनिंग में भी बढ़ोतरी देखने को मिली। क्रेडिट कार्ड, पर्सनल लोन और एग्रीकल्चर पोर्टफोलियो सेगमेंट में एसेट क्वॉलिटी में गिरावट रही।

अनुमानों की तर्ज नहीं पर रही नेट इंटेरस्ट इनकम

फंडों की कॉस्ट बढ़ने का असर नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) पर देखने को मिला है। कई बैंकों ने NII में साल दर साल आधार पर बढ़ोतरी हासिल की है, लेकिन उनकी परफॉर्मेंस अनुमान के मुताबिक नहीं रही। 9 प्राइवेट बैंकों की एनालिसिस के मुताबिक, NII में सालाना 15.5 पर्सेंट की ग्रोथ देखने को मिली है। HDFC बैंक की NII ग्रोथ 26 पर्सेंट रही, जबकि ICICI बैंक और एक्सिस बैंक इस मामले में पीछे रहे और इनकी ग्रोथ क्रमशः 12 पर्सेंट और 7 पर्सेंट रही। देश के चौथे सबसे बड़े प्राइवेट बैंक कोटक महिंद्रा बैंक की नेट इंटरेस्ट इनकम सालाना आधार पर 10 पर्सेंट की बढ़ोतरी के साथ 6,842 करोड़ रुपये रही, जबकि बैंक की नेट इंटरेस्ट इनकम 7,067 करोड़ रुपये रहने का अनुमान दताया गया था।

नेट इंटरेस्ट मार्जिन के मोर्चे पर भी प्रेशर

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