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Prop Trading scam: कोई केवायसी नहीं, कोई डॉक्युमेंटेशन नहीं, जानिए प्रॉप ट्रेडिंग की आड़ में कैसे चल रहा है यह फर्जीवाड़ा

अब मुंबई, दिल्ली-एनसीआर और राजस्थान के स्टॉक ब्रोकर्स से जुड़े कई इनेवस्टर्स को भी प्रॉप-ट्रेडिंग में बड़ा नुकसान होने का पता चला है। किसी तरह का एग्रीमेंट, KYC और पेपर ट्रेल नहीं होता है। ब्रोकिंग फर्म्स और ट्रेडर्स के बीच आपसी भरोसे से यह ट्रेड होता है। तब तक कोई दिक्कत नहीं आती है जब तक ट्रेडर्स को प्रॉफिट होता है

Edited By: Rakesh Ranjanअपडेटेड Nov 10, 2025 पर 5:57 PM
Prop Trading scam: कोई केवायसी नहीं, कोई डॉक्युमेंटेशन नहीं, जानिए प्रॉप ट्रेडिंग की आड़ में कैसे चल रहा है यह फर्जीवाड़ा
ट्रेडिंग का यह पैटर्न पहले कुछ सीमित समूह में इस्तेमाल होता था। लेकिन पिछले दो सालों में इसका काफी विस्तार हुआ है।

हाल में करीब 150 करोड़ रुपये का सूरत का प्रॉपरायटरी ट्रेडिंग स्कैम सामने आया था। अब मुंबई, दिल्ली-एनसीआर और राजस्थान के स्टॉक ब्रोकर्स से जुड़े कई इनेवस्टर्स ने भी ऐसे ट्रेड्स में बड़े नुकसान होने की जानकारी दी है। हालांकि, उन्हें सूरत ट्रेडिंग स्कैम के ट्रेडर्स जितना नुकसान नहीं हुआ है, लेकिन यह अब साफ हो गया है कि प्रॉप-ट्रेडिंग का इस्तेमाल ट्रेडर्स के साथ धोखाधड़ी के लिए धड़ल्ले से हो रहा है।

ब्रोकर्स और ट्रेडर्स के बीच आपसी भरोसे पर होता है ट्रेड्स

यह पाया गया है कि Prop-Trading में किसी तरह का एग्रीमेंट, KYC और पेपर ट्रेल नहीं होता है। ब्रोकिंग फर्म्स और ट्रेडर्स के बीच आपसी भरोसे से यह ट्रेड होता है। तब तक कोई दिक्कत नहीं आती है जब तक ट्रेडर्स को प्रॉफिट होता है। एक बार डिफॉल्ट या बड़ा नुकसान होने पर यह पूरा मामला सामने आता है। शुरुआत में सूरत के प्रॉपरायटरी ट्रेडिंग स्कैम में कुछ ही ट्रेडर्स को नुकसान होने का अनुमान था। लेकिन, बाद में इसका दायरा बढ़ गया।

प्रॉपरायटरी ट्रेडिंग की आड़ में चल रहा बड़ा फर्जीवाड़ा

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