चुनावों से पहले कई राजनीतिक दल और उनके नेता वोटर्स को लुभाने के लिए कृषि कर्ज माफ करने का वादा करते हैं। राजनीतिक दलों के इसे वादे का किसानों पर सीधा असर पड़ता है। कई बार यह वादा करने वाला राजनीतिक दल सत्ता में आने में नाकाम रहता है, लेकिन इस ऐलान से वह काफी बड़ा नुकसान कर देता है। दरअसल, इस तरह के ऐलान के बाद ऐसे किसान भी लोन की किस्त चुकाना बंद कर देते हैं, जो पहले नियमित रूप से चुका रहे थे। दरअसल, उन्हें लगता है कि अब उनका लोन माफ हो जाएगा। इसका बहुत खराब असर बैंकों खासकर सरकारी बैकों की सेहत पर पड़ता है।
कृषि कर्ज माफी स्कीम से किसानों को नुकसान
खास बात यह है कि इस ऐलान का असर सिर्फ एक राज्य तक सीमित नहीं होता। पड़ोसी राज्यों के किसान भी लोन माफ करने की मांग शुरू कर देते हैं। सच यह है कि लोन माफी से किसान को लंबी अवधि में फायदा नहीं होता है। लेकिन, शॉर्ट टर्म में इसका असर पड़ता है। जब वह भविष्य में लोन के लिए बैंक की ब्रांच में जाता है तो मैनेजर उसे लोन देने में दिलचस्पी नहीं दिखाता। यह भी समझने की जरूरत है कि छोटे और भूमिहीन किसानों को लोन माफी का कोई फायदा नहीं होता है।
बैंकों की वित्तीय सेहत पर बड़ी चोट
कृषि कर्ज माफी के ऐलान से बैंकों की मुसीबत बढ़ जाती है। बैंक एंप्लॉयीज दबाव महसूस करने लगते हैं। इसकी वजह यह है कि बैंकों के पास सरकार के आदेश को मानने के सिवाय दूसरा कोई रास्ता नहीं होता। इस बारे में बैंकों को सरकार से मिलने वाली राहत कभी समय पर नहीं आती है। इंडिया में सरकार हर साल कृषि कर्ज के लिए एक टारगेट तय करती है। बैंकों के जरिए यह पैसा किसानों को कृषि कर्ज के रूप में दिया जाता है।
दो बार देशभर में कर्ज माफी स्कीम आ चुकी है
अब तक दो बार पूरे देश में कृषि कर्ज माफी स्कीम आ चुकी है। पहली स्कीम 1990 और दूसरी 2008 में आई थी। पिछले एक दशक में 18 राज्यों ने 3 लाख करोड़ रुपये के कृषि कर्ज माफ किए हैं। इस साल जुलाई में जारी आईआईएफएल सिक्योरिटीज की रिपोर्ट के मुताबिक, कृषि कर्ज माफी की वजह से 30-38 फीसदी एग्री लोन डूब गया है। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि अगले 18 महीनों में कम से कम 6 राज्यों में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। इस दौरान राजनीतिक दल किसानों को लुभाने के लिए कृषि कर्ज माफ करने का वादा कर सकते हैं।
तेलंगाना ने 31,000 करोड़ की कर्ज माफी स्कीम का ऐलान किया
इस साल जून में तेलंगाना सरकार ने 31,000 करोड़ रुपये का कृषि कर्ज माफ करने का ऐलान किया। इस स्कीम के तहत राज्य के किसानों के 2 लाख रुपये तक के लोन माफ हो जाएंगे। पंजाब के किसानों ने भी ऐसी मांग करनी शुरू कर दी है। इसका सबसे बड़ा नुकसान सरकारी बैंकों को उठाना पड़ेगा। इन राज्यों में सरकारी बैंकों को कृषि कर्ज का ग्रॉस एनपीए (डूबा कर्ज) पहले से ही 15-25 फीसदी के बीच है। प्राइवेट बैंकों के मामले में यह 3-4 फीसदी है। यह ध्यान में रखना जरूरी है कि इन राज्यों में कृषि कर्ज का बकाया पैसा 6.7 लाख करोड़ रुपये है। यह बैंकों के कुल कृषि कर्ज का करीब 25 फीसदी है।
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स्मॉल फाइनेंस बैंकों पर भी पड़ सकता है असर
लोन माफी स्कीम का असर स्मॉल फाइनेंस बैंकों और माइक्रोफाइनेंस इंस्टीट्यूशंस पर भी पड़ सकता है। आईएफएफल की रिपोर्ट में कहा गया है कि इसका उन बैंकों पर ज्यादा असर जिनका बिजनेस मध्य प्रदेश, राजस्थान और केरल में ज्यादा है। इन राज्यों में मार्च 2024 के बाद लोन पेमेंट में देरी देखने को मिली है। इससे बैंकों की एसेट क्वालिटी को बड़ी रिस्क हो सकता है।