Disinvestment Policy: IDBI Bank के अलावा इस कंपनी के भी शेयर बेचेगी सरकार, आपके पोर्टफोलियो में है?

Disinvestment Policy: लोकसभा चुनाव के नतीजे मंगलवार 4 जून को आने वाले हैं। एग्जिट पोल के रुझानों के हिसाब से केंद्र में एक बार फिर मोदी सरकार बन रही है। नई सरकार के कार्यकाल में पहले 100 दिनों का एजेंडा क्या होगा, इसे लेकर अनुमानों का दौर शुरू हो गया है। अगली सरकार में शुरुआती 100 दिनों में विनिवेश पर फोकस रहेगा और इसमें IDBI बैंक के साथ-साथ इस बार एक और कंपनी लिस्ट में टॉप पर है

अपडेटेड Jun 03, 2024 पर 3:56 PM
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IDBI बैंक के साथ-साथ इस बार शिपिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया सरकार की विनिवेश योजना की लिस्ट में टॉप पर है।
     
     
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    Disinvestment Policy: लोकसभा चुनाव के नतीजे मंगलवार 4 जून को आने वाले हैं। एग्जिट पोल के रुझानों के हिसाब से केंद्र में एक बार फिर मोदी सरकार बन रही है। नई सरकार के कार्यकाल में पहले 100 दिनों का एजेंडा क्या होगा, इसे लेकर अनुमानों का दौर शुरू हो गया है। सीएनबीसी आवाज को सूत्रों के हवाले से जो जानकारी मिली है, उसके मुताबिक अगली सरकार में शुरुआती 100 दिनों में विनिवेश पर फोकस रहेगा। IDBI बैंक के साथ-साथ इस बार शिपिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया सरकार की विनिवेश योजना की लिस्ट में टॉप पर है। आईडीबीआई बैंक के शेयर आज BSE पर 7.31 फीसदी की बढ़त के साथ 91.67 रुपये और शिपिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया के शेयर 5.68 फीसदी के उछाल के साथ 259.55 रुपये के भाव पर बंद हुए हैं।

    Shipping Corporation of India में कितनी हिस्सेदारी है सरकार की

    सूत्रों के मुताबिक सरकार शिपिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया की हिस्सेदारी बेच सकती है। इसमें सरकार की 63.75 फीसदी हिस्सेदारी है। सूत्रों के मुताबिक इसके लिए बोली आंतरिक तौर पर मंगाई जा सकती है। इससे पहले शिपिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया की लैंड एसेट्स एंटिटी को पहले ही अलग कर मार्केट में लिस्ट किया जा चुका है।


    IDBI Bank की विनिवेश प्रक्रिया में आ सकती है तेजी

    सरकार आईडीबीआई बैंक में अपनी हिस्सेदारी बेचने की कोशिश में है। पिछले कुछ समय से यह योजना ठंडे बस्ते में है। हालांकि सूत्रों के मुताबिक अगली सरकार के गठन के बाद शुरुआती 100 दिनों के एजेंडे के तहत इस पर सरकार तेजी से फैसला ले सकती है। सूत्रों के मुताबिक आरबीआई उन लोगों के नामों पर विचार कर रहा है जिन्होंने इसे खरीदने में दिलचस्पी दिखाई थी। इस पर 'फिट एंड प्रॉपर' प्रक्रिया के तहत विचार किया जा रहा है। एक बार आरबीआई अपनी तरफ से नाम छांट लेगा तो फिर इस पर आखिरी मंजूरी डिपार्टमेंट ऑफ इनवेस्टमेंट एंड पब्लिक एसेट मैनेजमेंट (DIPAM) को लेना होगा। अभी सरकार की इसमें 49.24 फीसदी और एलआईसी की 45.48 फीसदी हिस्सेदारी है।

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