पीवीआर-आईनॉक्स (PVR-Inox) ने दर्शकों की संख्या बढ़ाने के लिए एक रुपये में 30 मिनट के लिए मूवी ट्रेलरों की स्क्रीनिंग शुरू की है। यह ऐसे समय में आया है जब मल्टीप्लेक्स में कम ऑक्यूपेंसी से जूझ रहे हैं यानी कि इसमें दर्शकों की संख्या कम नजर आ रही है। मल्टीप्लेक्स दिग्गज ने पिछले वित्तीय वर्ष के पहले नौ महीनों में कोविड-पूर्व लेवल की तुलना में अपने फुटफॉल में 15 प्रतिशत की गिरावट देखी। आप हिंदी, अंग्रेजी और अपनी क्षेत्रीय भाषाओं में फिल्मों के ट्रेलरों से भरे 30 मिनट के शो को देखने के लिए सिनेमाघरों में आ सकते हैं। इससे आपको अगले कुछ महीनों में आने वाली फिल्मों की एक झलक देखने को मिल सकेगी।
पीवीआर-आईनॉक्स ने देश भर में अपनी स्क्रीन पर 30 मिनट के ट्रेलर शो के रूप में लॉन्च किया है। लेकिन ऐसी पहल के पीछे क्या आइडिया है? क्या यह आइडिया वास्तव में अधिक लोगों को फिल्मों के शो में ला पायेगा ?
पीवीआर-आईनॉक्स के सह-सीईओ गौतम दत्ता (Gautam Dutta, Co-CEO of PVR-Inox) ने कहा, "ट्रेलर पूरी तरह से एक फिल्म का सैंपल देखने के बारे में हैं। यदि आपने जो देखा है उसका एक सैंपल पसंद करते हैं, तो हमारा मानना है कि इससे हमें बहुत अधिक दर्शक मिलेंगे।"
PVR-Inox ने टिकट की कीमत प्रति शो एक रुपये रखी है। ये शो प्राइम टाइम के आसपास रखा जाएगा। दत्ता ने कहा, "टिकट की कीमत के बारे में बहुत बहस हुई - ऐसा फाइनल हुआ कि कम से कम अगले कुछ महीनों के लिए हमें उपभोक्ताओं के आने और ट्रेलरों का आनंद लेने के लिए रेड कार्पेट को वस्तुतः मुफ्त में बिछाने पर ध्यान देना चाहिए।"
30 मिनट के ट्रेलर शो को पहले पायलट के रूप में विभिन्न स्क्रीन पर चलाया गया था। पीवीआर-आईनॉक्स का कहना है कि इसमें 35 प्रतिशत से अधिक ऑक्यूपेंसी देखी गई।
यह पेशकश ऐसे समय में आई है जब पठान ( Pathaan) और भोला (Bhola) की बॉक्स ऑफिस पर अच्छी कमाई के बावजूद सिनेमाघरों में दर्शकों की संख्या में कमी बनी हुई है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि ये आइडिया काम नहीं आयेगा। कंपनी के लिए फुटफॉल या एफएंडबी बिक्री में सुधार नहीं नजर आयेगा।
Elara Capital के करण तौरानी (Karan Taurani of Elara Capital) ने कहा, "यह दर्शकों को आकर्षित करने का एक प्रयास है। हालांकि यह एक चुनौती होगी क्योंकि हम नहीं जानते कि वास्तव में कितने लोग ट्रेलर देखने आएंगे। अधिकांश स्क्रीन पर 5 शो होते हैं। यदि आपके पास ये ट्रेलर चलाए जा रहे हैं तो आपको शो की संख्या में व्यवधान दिखाई देगा। इससे समग्र दक्षता कम हो जाएगी। इसके अलावा यदि दर्शक फूड प्रोडक्ट्स नहीं खरीदते हैं, तो यह कुल मिलाकर घाटे का सौदा है।"