भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (The Securities and Exchange Board of India (SEBI) ने गुरुवार को ब्राइटकॉम ग्रुप लिमिटेड (Brightcom Group Ltd (BGL) और चार अन्य व्यक्तियों के खिलाफ फाइनेंशियल स्टेटमेंट्स में अनियमितताओं और महत्वपूर्ण जानकारी का खुलासा न करने के लिए एक अंतरिम आदेश सहित कारण बताओ नोटिस जारी किया। सेबी ने अपने आदेश में सुरेश कुमार रेड्डी, विजय कंचारिया, येराडोड्डी रमेश रेड्डी और वाई. श्रीनिवास राव को अपने परिवार के सदस्यों के माध्यम से या उन कंपनियों के माध्यम से जिसमें वे या उनके परिवार के सदस्य निदेशक हैं उस सभी को ब्राइटकॉम समूह में अपनी हिस्सेदारी नहीं बेचने के लिए कहा गया है।
इसके अलावा सेबी ने ब्राइटकॉम ग्रुप को 2014-15 से 2021-22 की अवधि के लिए अपने कंसोलिडेटेड फाइनेंशियल स्टेटमेंट्स की जांच करने का आदेश दिया ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि सभी लागू अकाउंटिंग स्टैंडर्ड के अनुपालन में हैं। सभी नॉन-कॉम्पिलयांस के असर का स्टेटमेंट इस ऑर्डर से तीन महीने के भीतर जमा करने के लिए भी कहा है।
इसके अलावा, सेबी ने कहा कि ब्राइटकॉम ग्रुप को इस आदेश की तारीख से सात दिनों के भीतर स्टॉक एक्सचेंज प्लेटफॉर्म पर सभी तिमाहियों के लिए करेक्ट शेयरहोल्डिंग पैटर्न दिखाने वाला स्टेटमेंट प्रकाशित करना होगा।
रेगुलेटर ने ब्राइटकॉम ग्रुप को पंद्रह दिनों के भीतर अपनी प्रत्येक सहायक कंपनी में कम से कम एक स्वतंत्र निदेशक को अपने निदेशक मंडल में निदेशक के रूप में नियुक्त करने के लिए कहा।
सेबी ने आदेश में ब्राइटकॉम ग्रुप से वित्त वर्ष 2014-15 और वित्त वर्ष 2021-22 के बीच की अवधि के लिए पंद्रह दिनों के भीतर अपनी प्रत्येक सहायक कंपनी के स्टैंडअलोन फाइनेंशियल स्टेटमेंट्स को अपनी वेबसाइट पर प्रकाशित करने को कहा है।
सेबी ने अपनी जांच पाया कि ब्राइटकॉम ग्रुप की विदेशी सहायक कंपनियों से संबंधित बुक ऑफ अकाउंट्स और अन्य सूचनाओं में कई कमियां देखी गईं। यह मुख्य रूप से वित्त वर्ष 2019-20 में 868.30 करोड़ रुपये एसेट के नुकसान से संबंधित है।
बीजीएल ने वित्त वर्ष 2019-20 के कंसोलिडेटेड फाइनेंशियल स्टेटमेंट्स में 863.80 करोड़ रुपये का घाटा दर्ज किया था। हालांकि बीजीएल के फाइनेंशियल स्टेटमेंट्स की जांच करने पर वित्त वर्ष 2019-20 में एसेट की कोई घाटा नहीं दिखा। सेबी ने कहा कि यह इंगित करता है कि उक्त घाटा सहायक कंपनियों के कारण था।
सेबी ने जोर देकर कहा कि प्रमोटर्स ने 2014 से 2022 तक शेयरों का निपटान किया। इस बारे में से एक्सचेंजों को कोई भी सूचना नहीं दी गई थी। सेबी ने कहा कि 34 में से 31 तिमाहियों में गलत शेयरहोल्डिंग पैटर्न दिया गया था।