Railway Stocks: बजट 2026 से पहले इन 5 रेलवे स्टॉक्स पर रखें नजर, मिल सकता है तगड़ी कमाई का मौका

Railway Stocks: केंद्रीय बजट 2026 से पहले रेलवे शेयर फिर फोकस में हैं। किराया बढ़ोतरी और कैपेक्स उम्मीदों के बीच 5 सरकारी और प्राइवेट रेलवे स्टॉक्स निवेशकों के रडार पर हैं। जानिए इन स्टॉक्स की ताकत और एक्सपर्ट की राय।

अपडेटेड Jan 11, 2026 पर 7:21 PM
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Texmaco Rail & Engineering फ्रेट वैगन, रेल इंफ्रास्ट्रक्चर, इलेक्ट्रिकल सिस्टम और कास्टिंग्स में काम करती है।

Railway Stocks: केंद्रीय बजट 2026 (Union Budget 2026) के नजदीक आते ही रेलवे से जुड़े शेयर फिर निवेशकों के रडार पर आ गए हैं। वजह सिर्फ प्री-बजट पोजिशनिंग नहीं है, बल्कि रेलवे के फाइनेंस सुधार की दिशा में उठाया गया एक अहम कदम भी है।

26 दिसंबर 2025 को भारतीय रेलवे ने किराए में बढ़ोतरी की। इसे अब रेवेन्यू डिसिप्लिन की तरफ बढ़ता कदम माना जा रहा है। निवेशकों को उम्मीद है कि इससे रेलवे के इंटरनल कैश फ्लो बेहतर होंगे और लंबे समय में सिस्टम पर बजट का दबाव कम होगा।

बजट 2026 से सेफ्टी अपग्रेड, मॉडर्नाइजेशन और कैपेसिटी एक्सपेंशन को लेकर भी बड़ी उम्मीदें हैं। इसमें Kavach, नई Vande Bharat स्लीपर ट्रेनें और Dedicated Freight Corridors जैसे प्रोजेक्ट शामिल हैं। इसी वजह से रेलवे से जुड़ी कई कंपनियां फोकस में हैं।


IRFC

सरकारी कंपनी Indian Railway Finance Corporation यानी IRFC रेलवे की फाइनेंसिंग आर्म है। इसका काम रोलिंग स्टॉक और इंफ्रास्ट्रक्चर एसेट्स को लॉन्ग-टर्म लीज के जरिए फंड करना है। इसका बिजनेस मॉडल सिंपल, स्थिर और कम रिस्क वाला माना जाता है।

Q2 FY26 में कंपनी का नेट इंटरेस्ट मार्जिन बढ़कर 1.55% हो गया। इसकी वजह रेलवे से बाहर पावर, रिन्यूएबल और दूसरे सरकारी इंफ्रास्ट्रक्चर एंटिटीज को दिया गया लोन है, जहां स्प्रेड ज्यादा है। इसके बावजूद रिस्क सीमित है, क्योंकि 98% से ज्यादा एसेट्स अभी भी रेलवे और सरकारी संस्थाओं से जुड़े हैं। ऑपरेटिंग कॉस्ट बेहद कम होने से बैलेंस शीट बढ़ने पर भी मार्जिन सुरक्षित रहते हैं।

IRFC के शेयर शुक्रवार को 2.41% की गिरावट के साथ 121.27 रुपये पर बंद हुए। स्टॉक पिछले 1 महीने में 7.04% चढ़ा है। 1 साल के दौरान इसने 5.58% का नेगेटिव रिटर्न दिया है। हालांकि, पिछले 5 साल में यह 388.99% का मल्टीबैगर रिटर्न दे चुका है।

Rail Vikas Nigam Limited

पब्लिक सेक्टर की Rail Vikas Nigam Limited यानी RVNL रेलवे और ट्रांसपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की एक्जीक्यूशन कंपनी है। इसका काम सिविल वर्क्स, इलेक्ट्रिफिकेशन, सिग्नलिंग और मेट्रो रेल तक फैला है।

Q2 FY26 में मॉनसून की वजह से कमजोर शुरुआत के बाद प्रदर्शन में सुधार हुआ, लेकिन मार्जिन दबाव में रहे। इसकी वजह यह है कि अब कंपनी के ज्यादा प्रोजेक्ट्स प्रतिस्पर्धी बोली के जरिए आ रहे हैं, जिनमें मार्जिन कम होता है।

जैसे-जैसे प्रोजेक्ट्स पूरे होंगे और स्कोप-चेंज क्लेम्स सेटल होंगे, मार्जिन में सुधार की उम्मीद है। ऑर्डर बुक अगले कुछ सालों की अच्छी विजिबिलिटी देती है। कंपनी का कैपेक्स कम है और ज्यादातर फंडिंग इंटरनल कैश फ्लो से होगी।

RVNL के शेयर शुक्रवार को करीब 3% की गिरावट के साथ 333 रुपये के आसपास बंद हुए। स्टॉक पिछले 1 महीने में करीब 6% चढ़ा है। वहीं, पिछले 1 साल में RVNL ने 6.83% का नेगेटिव रिटर्न दिया है। पिछले 5 साल में RVNL निवेशकों को 957.05% का मल्टीबैगर रिटर्न दे चुका है।

IRCTC

IRCTC रेलवे के नॉन-फेयर रेवेन्यू मॉडल का सबसे अहम हिस्सा है। यह इंटरनेट टिकटिंग, कैटरिंग, पैकेज्ड ड्रिंकिंग वॉटर और टूरिज्म सर्विसेज संभालती है। इसका बिजनेस मॉडल काफी हद तक एसेट-लाइट है। Q2 FY26 में कंपनी का रेवेन्यू 7.7% बढ़ा और EBITDA मार्जिन 35.3% रहा।

यह सुधार कीमतें बढ़ाने से नहीं, बल्कि बेहतर कॉस्ट कंट्रोल, डिजिटल टिकटिंग की बढ़ती हिस्सेदारी और नॉन-कंवीनियंस फी इनकम से आया। इंटरनेट टिकटिंग सबसे ज्यादा मुनाफे वाला सेगमेंट बना हुआ है। टूरिज्म बिजनेस में EBITDA लेवल पर अच्छा टर्नअराउंड देखने को मिला, जबकि कैटरिंग मार्जिन स्थिर रहे।

आगे कंपनी डिजिटल प्लेटफॉर्म मजबूत करने, यूनिफाइड ट्रैवल पोर्टल, पेमेंट एग्रीगेशन और Rail Neer कैपेसिटी बढ़ाने पर काम कर रही है। ये सभी निवेश इंटरनल एक्रूअल्स से होंगे।

IRCTC का शेयर शुक्रवार को 2.36% की गिरावट के साथ 640.95 रुपये पर बंद हुआ। 1 साल में यह 14.18% नीचे आया है। वहीं, 5 साल में इसने 122.37% का रिटर्न दिया है।

RITES

RITES एक ट्रांसपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर कंसल्टेंसी कंपनी है, जो रेलवे, हाईवे, पोर्ट्स और अर्बन इंफ्रास्ट्रक्चर में काम करती है। इसकी कमाई का बड़ा हिस्सा कंसल्टेंसी और प्रोजेक्ट मैनेजमेंट से आता है।

Q2 FY26 में रेवेन्यू 1.5% बढ़ा, जबकि EBITDA मार्जिन बढ़कर 24.4% हो गया। इसकी वजह कंसल्टेंसी और एक्सपोर्ट सेगमेंट से बेहतर योगदान रहा, जिसने टर्नकी बिजनेस की कमजोरी की भरपाई की।

आगे FY26 के आखिर और FY27 में टर्नकी रेवेन्यू में सुधार की उम्मीद है। कंसल्टेंसी और एक्सपोर्ट मार्जिन ड्राइवर बने रहेंगे। कंपनी का कैपेक्स कम है और फंडिंग जरूरत इंटरनल एक्रूअल्स से पूरी होगी। फिलहाल शेयर 28 के P/E पर ट्रेड कर रहा है।

RITES के शेयर शुक्रवार को 1.83% की गिरावट के साथ 232.29 रुपये पर बंद हुए। 1 महीने में स्टॉक 2.83% चढ़ा है। वहीं, 1 साल में इसने 16.52% का नेगेटिव रिटर्न दिया है।

Texmaco Rail & Engineering

प्राइवेट सेक्टर की रेलवे कंपनी Texmaco Rail & Engineering फ्रेट वैगन, रेल इंफ्रास्ट्रक्चर, इलेक्ट्रिकल सिस्टम और कास्टिंग्स में काम करती है। रेलवे के फ्रेट, इलेक्ट्रिफिकेशन और सेफ्टी खर्च से कंपनी को सीधा फायदा मिलता है।

Q2 FY26 में प्रदर्शन डिमांड से ज्यादा सप्लाई साइड दिक्कतों से प्रभावित रहा। वैगन व्हीलसेट की कमी और फाउंड्री एक्सपोर्ट कमजोर रहने से रेवेन्यू 6.5% घटा। हालांकि EBITDA मार्जिन 10.5% रहा, जो पिछली तिमाही से थोड़ा बेहतर है।

आगे कंपनी ऑर्डर बुक एक्जीक्यूशन और बिजनेस मिक्स सुधार पर फोकस करेगी। भविष्य का कैपेक्स फाउंड्री एक्सपेंशन और टेक्नोलॉजी अपग्रेड पर होगा, जिसे ज्यादातर इंटरनल एक्रूअल्स से फंड किया जाएगा। फिलहाल शेयर 25 के P/E पर ट्रेड कर रहा है।

Texmaco Rail का स्टॉक भी शुक्रवार को लाल निशान में 127 रुपये पर बंद हुआ। पिछले 6 महीने में स्टॉक 22.56% गिरा है। वहीं, 1 साल में इसने 26.11% का नेगेटिव रिटर्न दिया है। हालांकि, 5 साल में यह 309.55% का मल्टीबैगर रिटर्न दे चुका है।

क्या रेलवे कंपनियों पर लगाना चाहिए दांव

मार्केट एक्सपर्ट के मुताबिक, रेलवे सेक्टर में अब सभी शेयर सस्ते नहीं बचे हैं। Nifty Railways PSU Index करीब 26 के P/E पर ट्रेड कर रहा है, लेकिन कंपनियों के बीच वैल्यूएशन का फर्क काफी बड़ा है।

ऐसे माहौल में टॉप-डाउन दांव जोखिम भरा हो सकता है। अब जरूरत है बॉटम-अप अप्रोच की, जहां मजबूत ट्रैक रिकॉर्ड, संतुलित बैलेंस शीट और वाजिब वैल्यूएशन वाली कंपनियों को चुना जाए।

INVAsset PMS में बिजनेस हेड हर्षल दासानी ने कहा कि रेलवे शेयरों को पूरे सेक्टर के दांव की तरह नहीं, बल्कि चुनिंदा मौके के तौर पर देखना चाहिए।

उन्होंने कहा, 'कई शेयरों के मौजूदा वैल्यूएशन में पहले से ही काफी ज्यादा उम्मीदें शामिल हैं। ऐसे में स्टॉक सिलेक्शन सबसे अहम हो जाता है, क्योंकि सिर्फ सेंटिमेंट के दम पर आई तेजी लंबे समय तक टिक नहीं पाती।'

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