दिग्गज इनवेस्टर और बीएसई के मेंबर रमेश दमानी (Ramesh damani) ने इनवेस्टर्स कम्युनिटी पर Charlie Munger के असर के बारे में बताया है। उन्होंने कहा कि मंगेर का असर दमानी परिवार की तीन पीढ़ियों पर रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि किसी कंपनी के स्टॉक को लंबे समय तक अपने पास बनाए रखना और इसे कंपाउंड होते देखना उन्होंने मंगेर से सीखा था। सीएनबीसी-टीवी18 को दिए इंटरव्यू में उन्होंने विस्तार से बताया कि बर्कशायर हैथवे के वाइस-चेयरमैन और Warren Buffett के करीबी दोस्त ने किस तरह दमानी परिवार पर असर डाला था। मंगेर का निधन 99 साल की उम्र में 28 नवंबर को कैलिफोर्निया में हो गया। दमानी ने कहा कि उन्होंने मंगेर से जीवन के भी कई सबक सीखे हैं। उन्होंने कहा कि वह सौभाग्यशाली है कि उन्होंने मंगेर के कुछ एजीएम में हिस्सा लिया। उन्हें मंगेर के साथ बैठने का भी मौका मिला। उनके साथ बैठना मेरे जीवन के यादगार पलों में से एक है।
दमानी ने कहा कि मंगरे जब बोलते थे तो उनमें विश्वास नजर आता था। मैं कहक सकता हूं कि उन्होंने वैल्यू इनवेस्टर्स की पूरी एक पीढ़ी को प्रेरित किया। उन्होंने मंगेर से यह समझा कि उतार-चढ़ाव मार्केट का एक स्वभाव है। मंगेर और वॉरेन बफे ने हम सभी को सिखाया। उन्होंने उदाहरण के साथ चीजों के बारे में बताया। दमानी ने कहा कि मंगेर के इंडिया में बहुत ज्यादा फैंस हैं। इनवेस्टर्स उनका बहुत सम्मान करते थे। पुणे में एक इंस्टीट्यूट का नाम उनके नाम पर है।
उन्होंने कहा कि मंगेर का मानना था कि जो कुछ भी आपके सामने आता है, उससे आपको निपटना पड़ता है। आपको शिकायत करने की आदत नहीं होनी चाहिए। मैंने स्टॉक्स को लंबे समय तक अपने पास रखना भी मंगेर और बफे से सीखा है। मैं ऐसा स्टॉक तलाशने की कोशिश करता हूं, जिसे मैं अपनै पास 10, 20 और 25 साल के लिए रख सकता हूं। मंगेर ने पहला निवेश कोका कोला में किया था। सब जानते हैं कि कोक और कोस्टको में निवेश से उन्होंने कितना मुनाफा कमाया।
मंगेर के बारे में बताते हुए दमानी ने कहा कि मंगेर मानते थे कि कानून और ग्रोथ स्ट्रेटेजी के लिहाज से इंडिया सिंगापुर से काफी कुछ सीखेगा। दमानी ने कहा कि डेरिवेटिव ट्रेडिंग और ऑप्शंस में जिस तरह का वॉल्यूम है उसे लेकर इंडिया में काफी गुस्सा है। लेकिन, अगर मंगेर से इस बारे में पूछा जाता तो वह कहते कि इक्विटी में रियल एस्टेट की तरह ट्रेड नहीं होना चाहिए। मुझे लगता है कि उनका मानना था कि बहुत ज्यादा ट्रेडिंग कर लोग नॉन-प्रोडक्टिव काम करते हैं।