दिग्गज इनवेस्टर और बीएसई के मेंबर रमेश दमानी का मानना है कि शेयर बाजार जियोपॉलिटिकल टेंशन के सबसे खराब फेज से बाहर आ चुका है। उन्होंने अगले 3 से 6 महीनों में बाजार में तेजी की उम्मीद जताई है। उन्होंने डिफेंस, क्रिटिकल मिनरल्स और इंफ्रास्ट्रक्चर को इनवेस्टमेंट की थीम बताया। मध्यपूर्व में लड़ाई की वजह से मार्च में शेयर बाजार में बड़ी गिरावट आई। अप्रैल में मार्केट में रिकवरी दिखी है।
बाजार पिछले महीनों के तेज उतार-चढ़ाव के फेज से बाहर निकल रहा
दमानी ने सीएनबीसी-टीवी18 को दिए इंटरव्यू में कहा, "मेरा मानना है कि लड़ाई के सबसे खराब सालों को हम पीछे छोड़ चुके हैं। मार्केट का फेवर कुछ नई थीम को मिल सकता है।" उनका मानना है कि बाजार अब पिछले कुछ महीनों में तेज उतार-चढ़ाव वाले फेज से बाहर निकल रहा है। उन्होंने कहा, "हमें बीते तीन महीनों में तेज उतार-चढ़ाव के उलट अगली तिमाही या छमाही में तेजी दिख सकती है।"
डिफेंस, क्रिटिकल मिनरल्स और इंफ्रास्ट्रक्चर में बनेगा पैसा
उन्होंने एक बार फिर से डिफेंस के साथ क्रिटिकल मिनरल्स और इंफास्ट्रक्चर थीम पर भरोसा जताया। उन्होंने कहा कि डिफेंस खासकर नए सेगमेंट्स की चमक बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि दुनिया में लड़ाई के बदलते स्वरूप से इनवेस्टमेंट के मौके भी बदल रहे हैं। उनके मुताबिक, हाल के जियोपॉलिटिकल डेवलपमेंट से पता चलता है कि ड्रोन और प्रिसिजन सिस्टम वाली लो-कॉस्ट टेक्नोलॉजीज की लड़ाई में भूमिका बढ़ रही है। पारंपरिक भारी सैन्य इक्विपमेंट की भूमिका घट रही है।
लड़ाई में टेक्नोलॉजी की भूमिका तेजी से बढ़ रही है
दमानी ने कहा, "लड़ाई का रूप पूरी तरह से बदल गया है...इसमें प्रिसिजन मिसाइल और गाइडेड ड्रोन की भूमिका बढ़ रही है।" इसका असर आगे देशों के डिफेंस बजट के ऐलोकेशन पर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि उन्होंने इमर्जिंग डिफेंस टेक्नोलॉजी खासकर इससे जुड़ी प्राइवेट सेक्टर की कंपनियों को ऐलोकेशन बढ़ाया है, जबकि कुछ पब्लिक सेक्टर कंपनियों में मुनाफा बुक किया है। डिफेंस सेक्टर में उन्होंने बज़े दांव लगाए हैं। इनमें मिसाइल, ड्रोन और लेजर सिस्टम्स शामिल हैं।
लोकल सप्लाई चेन पर बढ़ेगा देशों का फोकस
उन्होंने डिफेंस के अलावा लोकल सप्लाई चेन पर अपने बढ़ते फोकस के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि अब कई देश ग्लोबल सप्लाई चेन पर अपनी निर्भरता घटाना चाहते हैं। उनका (देशों का) फोकस रॉ मैटेरियल और मैन्युफैक्चरिंग में घरेलू क्षमता बढ़ाने पर है। उन्होंने कहा, "कोई देश अब विदेशी सप्लाई चेन पर निर्भर नहीं रह सकता। उन्हें खुद रॉ मैटेरियल डेवलप करना होगा। इससे न सिर्फ क्रिटिकल मिनरल्स में मौके बनेंगे बल्कि कॉपर और एल्युमीमियम जैसे बेसिक मैटेरियल्स में भी मौके होंगे। ऐसे में घरेलू कंपनियों की भूमिका बढ़ेगी।"