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RBI ने बैंकों के लिए एलसीआर का नया नियम क्यों लागू किया है, इसका बैंकों पर कितना असर पड़ेगा?

RBI का मानना है कि इंटरनेट और मोबाइल बैंकिंग जैसी नई सुविधाओं की वजह से बैंकों में जमा पैसे को लेकर रिस्क है। सिर्फ एक क्लिक के इस्तेमाल से यह पैसा बैंकों से निकल सकता है। ऐसे में बैकों के लिए अचानक बड़ी दिक्कत पैदा हो सकती है

MoneyControl Newsअपडेटेड Jul 29, 2024 पर 11:12 AM
RBI ने बैंकों के लिए एलसीआर का नया नियम क्यों लागू किया है, इसका बैंकों पर कितना असर पड़ेगा?
पहले स्थिति ऐसी नहीं थी, जब बैंकों में जमा पैसे को निकालने में काफी समय लग जाता था। ग्राहको को पहले बैंक के ब्रांच जाना पड़ता था, फॉर्म भरना पड़ता था। उसके बाद पैसा निकलता था।

आरबीआई ने पिछले हफ्ते लिक्विडिटी कवरेज रेशियो (एलसीआर) पर बैंकों के लिए एक ड्राफ्ट गाइडलाइंस जारी की। इसमें उन्हें डिपॉजिट पर बफर के रूप में ज्यादा लिक्विड सिक्योरिटीज अलग रखने को कहा गया है। इससे डिपॉजिटर्स के अचानक बैकों से अपना पैसा निकालने पर बैंकों को स्थिति से निपटने में मदद मिलेगी। ये नियम 1 अप्रैल, 2025 से लागू होंगे। आइए इस बारे में विस्तार से जानने की कोशिश करते हैं।

आरबीआई ने नियम में बदलाव क्यों किया?

आसान शब्दों में कहा जाए तो आरबीआई (RBI) तेज रफ्तार वाली टेक्नोलॉजी (मोबाइल, इंटरनेट बैंकिंग) को लेकर थोड़ा चिंतित है। ग्राहक सिर्फ एक क्लिक से बैंकों में जमा अपना काफी ज्यादा पैसा निकाल सकते हैं। पहले स्थिति ऐसी नहीं थी, जब बैंकों में जमा पैसे को निकालने में काफी समय लग जाता था। ग्राहको को पहले बैंक के ब्रांच जाना पड़ता था, फॉर्म भरना पड़ता था। उसके बाद पैसा निकलता था।

RBI ने खुद माना है कि हाल के सालों में बैंकिंग में बड़ा बदलाव आया है। उसने कहा है, "टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल बढ़ने से तुरंत पैसा ट्रांसफर करना और निकालना बहुत आसान हो गया है, लेकिन इससे रिस्क बढ़ गया है। इसके निपटने के लिए मैनेजमेंट के लिहाज से सक्रियता जरूरी है।" यही वजह है कि केंद्रीय बैंक ने एलसीआर फ्रेमवर्क में बदलाव किया है। इससे लिक्विडिटी के मामले में बैंकों की क्षमता बढ़ेगी।

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