मध्यपूर्व में चल रही लड़ाई का असर भारत सहित दुनियाभर की इकोनॉमी पर पड़ रहा है। इससे पहले ऐसा लग रहा था कि ग्रोथ की तेज रफ्तार और कम इनफ्लेशन की वजह से 2026 भारत के लिए शानदार रहेगा। लेकिन, अमेरिका-इजरायल और ईरान की लड़ाई ने उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। लड़ाई का सबसे ज्यादा असर क्रूड ऑयल की कीमतों पर पड़ा है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होने से क्रूड की कीमतें आसमान में पहुंच गई हैं। ऐसे में निगाहें आरबीआई की अप्रैल की मॉनेटरी पॉलिसी पर लगी हैं। क्या आरबीआई 8 अप्रैल को इंटरेस्ट रेट घटाएगा?
क्रूड का भाव लगातार 100 डॉलर से ऊपर
मार्च में ज्यादातर समय ब्रेंट क्रूड का भाव 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बना रहा। इससे महंगाई बढ़ने का खतरा पैदा हुआ है। मध्यपूर्व की लड़ाई शुरू हुए एक महीने से ज्यादा समय बीत गया है। अगर लड़ाई जारी रहती है तो इनफ्लेशन फिर से बेकाबू हो सकता है। हालांकि, अब तक इनफ्लेशन नियंत्रण में है। नई सीपीआई सीरीज पर आधारित इनफ्लेशन जनवरी में 3.4 फीसदी रहा। फूड इनफ्लेशन में भी नरमी के संकेत दिखे हैं।
ऑयल महंगा होने से महंगाई बढ़ने का खतरा
ऑयल की कीमतें बढ़ने से लॉजिस्टिक कॉस्ट बढ़ जाती है। इससे कई चीजों की कीमतें बढ़ने लगती हैं। ऐसे में आरबीआई के लिए फिर से इनफ्लेशन को काबू में करने का चैलेंज होगा। केंद्रीय बैंक दुनिया के दूसरे सेंट्रल बैंकों के कदमों को भी देखना चाहेगा। पश्चिम एशिया में लड़ाई को देखते हुए कई देशों के केंद्रीय बैंक इनफ्लेशन के अपने अनुमान में बदलाव कर सकते हैं। आरबीआई की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) की बैठक 6 अप्रैल को शुरू होगी। इसके नतीजे 8 अप्रैल को आएंगे।
FY26 में रुपये में आई है 10 फीसदी गिरावट
आरबीआई पर रुपये को संभालने का भी दबाव है। पिछले कुछ हफ्तों में डॉलर के मुकाबले रुपये में तेज गिराव आई है। वित्त वर्ष 2025-26 में रुपये में करीब 10 फीसदी गिरावट आई है। यह करीब एक दशक में किसी एक साल में रुपये में संभवत: सबसे ज्यादा गिरावट है। क्रूड ऑयल में उछाल और विदेशी फंडों की भारतीय शेयर बाजार में बिकवाली से रुपया गिरकर 94-95 के लेवल तक आ चुका है।
इंटरेस्ट रेट को अपरिवर्तित रख सकता है केंद्रीय बैंक
आरबीआई की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी मौजूदा हालात को देखते हुए अप्रैल की मॉनेटरी पॉलिसी में इंटरेस्ट रेट को अपरिवर्तित रख सकती है। वह इनफ्लेशन को काबू में करने के लिए इंटरेस्ट रेट को बढ़ा भी सकती है। लेकिन, ऐसा करने से ऐसे वक्त निवेश और खपत पर खराब असर पड़ सकता है, जब वैश्विक स्थितियां प्रतिकूल हैं। इस बात की संभावना ज्यादा है कि एमपीसी जल्दबाजी में इंटरेस्ट रेट घटाने का फैसला नहीं करेगी। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा 8 अप्रैल को इंटरेस्ट रेट को अपरिवर्तित बनाए रखने का ऐलान कर सकते हैं।