फाइनेंशियल प्रोडक्ट की मिस सेलिंग पर RBI सख्त, जानिए बैंक और इंश्योरेंस कंपनियों पर कितना होगा असर

मिस सेलिंग रोकने के लिए RBI ने जो ड्राफ्ट नियम जारी किए हैं, उन पर 4 मार्च तक सुझाव मंगाए गए हैं। उसके बाद ये निर्देश 1 जुलाई से लागू होंगे। मिस सेलिंग की RBI की परिभाषा पर नजर डालें तो इसमें ग्राहकों को बिना सहमति के गलत तरीके से स्कीम बेचना और ग्राहकों को भ्रामक जानकारी के साथ स्कीम बेचना शामिल हैं

अपडेटेड Feb 12, 2026 पर 6:28 PM
Story continues below Advertisement
जेफरीज का कहना है कि RBI के ड्राफ्ट नियम के असर को मैनेज किया जा सकता है। इन नियमों का क्रेडिट प्रोटेक्ट सेल्स पर असर संभव है

बैंकों के जरिए ग्राहकों को गलत तरीके से स्कीम बेचने पर RBI ने सख्त रूख अपनाया है। रिजर्व बैंक ने मिस-सेलिंग रोकने के लिए कड़े ड्राफ्ट नियम जारी किए हैं। ब्रोकरेज हाउस का मानना है कि बैंक और इंश्योरेंस कंपनियों पर इसका कुछ असर पड़ सकता है। RBI के ड्राफ्ट नियम और इस पर ब्रोकरेज की रिपोर्ट बताते हुए सीएनबीसी-आवाज केआशीष चतुर्वेदी मौजूदने कहा कि फाइनेंशियल प्रोडक्ट की गलत बिक्री पर RBI सख्त हो गया है। अब मिस-सेलिंग साबित होने पर ग्राहक को पूरा रिफंड मिलेगा।

मिस सेलिंग पर RBI सख्त

मिस सेलिंग रोकने के लिए RBI ने जो ड्राफ्ट नियम जारी किए हैं, उन पर 4 मार्च तक सुझाव मंगाए गए हैं। उसके बाद ये निर्देश 1 जुलाई से लागू होंगे। मिस सेलिंग की RBI की परिभाषा पर नजर डालें तो इसमें ग्राहकों को बिना सहमति के गलत तरीके से स्कीम बेचना और ग्राहकों को भ्रामक जानकारी के साथ स्कीम बेचना शामिल हैं।


मिस सेलिंग: RBI के ड्राफ्ट नियम जारी

मिस सेलिंग पर RBI के ड्राफ्ट नियम में कहा गया है। हर प्रोडक्ट के लिए ग्राहक की सहमति जरूरी होगी। हर प्रोडक्ट या सर्विस के लिए अलग से अर्जी होनी चाहिए। प्रोडक्ट बिक्री से पहले ग्राहकों की योग्यता देखी जाए। डायरेक्ट सेलिंग एजेंट और डायरेक्ट मार्केटिंग एजेंट पर सख्ती बढ़ेगी। बैंकों को थर्ड पार्टी प्रोडक्ट बेचने से मनाही होगी। प्रोडक्ट के विज्ञापन साफ होने चाहिए। शुल्क और रिस्क बताना जरूरी होना चाहिए।

बैंक स्टाफ को बीमा/म्यूचुअल फंड पर अलग इंसेंटिव नहीं मिलेगा। बैंक, थर्ड पार्टी और अपने प्रोडक्ट को मिक्स नहीं कर सकते। बैंक लोन देकर प्रोडक्ट बिक्री नहीं कर पाएंगे। डार्क पैटर्न के इस्तेमाल पर भी रोक का प्रावधान है। बैंकों द्वारा ज़रूरी एलिजिबिलिटी चेक, ट्रेनिंग ऑडिट और पब्लिक डिस्क्लोज़र के साथ DSA (Direct Selling Agent) और DMA ( DMAs) ज़्यादा कड़े कंट्रोल के तहत काम करेंगे।

RBI ऐसे इंसेंटिव स्ट्रक्चर पर रोक लगाता है जो प्रोडक्ट को प्रोमोट करने या गलत तरीके से बेचने को बढ़ावा देते हैं। बैंक कर्मचारियों को थर्ड-पार्टी प्रोडक्ट प्रोवाइडर से कोई भी इंसेंटिव लेने पर रोक होगी। बैंकों को अपने प्रोडक्ट के साथ थर्ड-पार्टी प्रोडक्ट को बंडल नहीं कर सकेंगे।

अगर बैंक के अपने प्रोडक्ट की बिक्री थर्ड-पार्टी प्रोडक्ट पर निर्भर है,तो कस्टमर को इसे कहीं और से खरीदने की आज़ादी होगी। बैंकों को बिना साफ़ सहमति के लोन से प्रोडक्ट खरीदने के लिए पैसे देने पर रोक होगी। नकली अर्जेंसी, छिपे हुए चार्ज, ज़बरदस्ती की कार्रवाई, सब्सक्रिप्शन ट्रैप जैसे डार्क पैटर्न के इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा।

RBI के ड्राफ्ट नियम पर जेफरीज

जेफरीज का कहना है कि RBI के ड्राफ्ट नियम के असर को मैनेज किया जा सकता है। इन नियमों का क्रेडिट प्रोटेक्ट सेल्स पर असर संभव है। क्रेडिट प्रोटेक्ट बैंक लोन के साथ जुड़े रहते हैं। APE में क्रेडिट प्रोटेक्ट का 1-6 फीसदी हिस्सा होता है। VNB में क्रेडिट प्रोटेक्ट सेगमेंट का बड़ा हिस्सा होता है। Max, SBI Life से ज्यादा हिस्सा ICICI Pru, HDFC Life का है। सख्ती बढ़ने से इनके मुनाफे पर कुछ असर संभव है। इसके अलावा छोटे निजी बैंकों के फीस या मुनाफे पर ज्यादा असर संभव है।

 

 

Defence deals : DAC की बैठक में हुआ बड़ा फैसला, 114 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद को मिली मंजूरी

हिंदी में शेयर बाजार स्टॉक मार्केट न्यूज़,  बिजनेस न्यूज़,  पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App  डाउनलोड करें।