आरबीआई ने उसके निर्देश नहीं मानने पर नवी के खिलाफ कार्रवाई की। आरबीआई ने नवी और तीन एनबीएफसी के 21 अक्टूबर से लोन देने पर रोक लगाई है। केंद्रीय बैंक ने जांच के बाद पाया कि नवी और ये एनबीएफसी नियमों का पालन नहीं कर रही हैं। आरबीआई ने कहा है कि ये कंपनियां लोन देने में कई नियमों का उल्लंघन कर रही हैं।
RBI ने जांच में पाया कि Navi Finserv ग्राहकों से ज्यादा इंटरेस्ट रेट वसूल रही हैं। कई दूसरे चार्जेज लगा रही हैं। कुछ चार्जेज ग्राहकों को बताए बिना वसूल रही हैं। आरबीआई ने पाया कि ये लोन की एवरग्रीनिंग भी कर रही हैं। एवरग्रीनिंग का मतलब ग्राहक को डिफॉल्ट से बचाने के लिए पुराना लोन अकाउंट बंद कर नया लोन जारी करना होता है। फ्लिपकार्ट के को-फाउंडर सचिन बंसल ने कुछ साल पहले नवी फिनसर्व की शुरुआत की थी। इसका हेडक्वार्टर बेंगलुरु है।
कई ग्राहकों ने की थी शिकायतें
मामले से जुड़े एक सूत्र ने बताया, "आरबीआई को बातचीत के दौरान ऐसा लगा था कि नवी का प्रबंधन इस मसले को लेकर गंभीर है। लेकिन, कई वादों के बाद भी नवी ने अपने कामकाज में किसी तरह का बदलाव नहीं किया।" एक दूसरे सूत्र ने बताया कि RBI के ओम्बड्समैन को ग्राहकों की कई शिकायते मिली थीं। इनमें ज्यादा इंटरेस्ट रेट वसूलने और पेनाल्टी लगाने की शिकायतें शामिल थीं। ग्राहकों ने यह भी कहा था कि कंपाउंडिंग इंटरेस्ट रेट के कैलकुलेशन को लेकर भी स्पष्टता नहीं थी। इसके चलते ग्राहकों को लोन पर सालाना करीब 60 फीसदी का इंटरेस्ट रेट चुकाने को मजबूर होना पड़ रहा था।
जांच के बाद केंद्रीय बैंक ने लिया एक्शन
दूसरे सूत्र ने बताया, "आरबीआई की सोशल मीडिया मॉनिटरिंग टीम ने यह पाया कि कंपनी के लोन पर ज्यादा इंटरेस्ट वसूलने और लोन की वसूली में बदतमीजी की शिकायतें कई ग्राहकों ने की है। आरबीआई की तरफ से सोशल मीडिया पर किए गए हर पोस्ट के जवाब में ग्राहकों ने अपनी शिकायतों के बारे में बताया। इसके बाद कंपनी के ऑनसाइट और ऑफसाइट प्रैक्टिसेज का एनालिसिस किया गया।"
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RBI ने ऑफसाइट डेटा का विश्लेषण किया
ऑफसाइट डेटा एनालिसिस में लोन की शर्तों के बारे में जानकारियां जुटाई जाती हैं। यह देखा जाता है कि क्या कंपनी ने ग्राहकों को उनकी लोन चुकाने की क्षमता से ज्यादा अमाउंट का लोन दिया है। यह भी देखा जाता है कि क्या एनबीएफसी ने एक ही ग्राहक को कई टॉप-अप लोन दिए हैं। दरअसल, इससे ग्राहक के लोन के जाल में फंसने का खतरा बढ़ जाता है। इस मामले में जानकारी देने वाले पहले सूत्र ने बताया कि आरबीआई ओम्पड्समैन आम तौर पर ग्राहकों के पक्ष में फैसला सुनाता है। इसकी वजह यह है कि उसका प्राथमिक उद्देश्य ग्राहकों के हितों की सुरक्षा करना है।