ट्रस्टप्लूटस वेल्थ (TrustPlutus Wealth) में निवेश सलाहकार, कैजाद होजदार (Kaizad Hozdar) का कहना है कि लंबी अवधि के नजरिए से देखें तो रियल्टी सेक्टर की एंसिलरी कंपनियों का कारोबार प्योर रियल एस्टेट कंपनियों के विपरीत कम सिक्लिकल होते हैं। जिसके चलते रियल्टी सेक्टर की एनसिलरी कंपनियों के फ्री कैश फ्लो में अच्छी ग्रोथ देखने को मिली है।" मनीकंट्रोल के साथ हुए एक बातचीत में उन्होंने आगे कहा कि होम इम्प्रूवमेंट सेक्टर की बड़ी कंपनियों का वैल्यूएशन प्रीमियम भी परंपरागत रूप से मजबूत और स्थिर रहा है। उनका मानना है कि यह ट्रेंड आगे भी जारी रहेगा। इन बातों को ध्यान में रखते हुए कैजाद होजदार को रियल्टी सेक्टर की एंसिलरी कंपनियां पसंद हैं। उनका कहना है कि इन कंपनियों को रिप्लेसमेंट बाजार से भी फायदा होता है। ये इनके लिए एक और बड़ा पॉजिटिव फैक्टर है।
घरेलू इकोनॉमी के विकास का निर्भर कंपनियों पर ज्यादा फोकस करें
इक्विटी रिसर्च, इक्विटी एडवाइजरी और पोर्टफोलियो मैनेजमेंट का 17 सालों से ज्यादा अनुभव रखने वाले होज़दार का कहना है कि इक्विटी निवेशकों के लिए इस समय घरेलू इकोनॉमी के विकास का निर्भर कंपनियों पर ज्यादा ध्यान केंद्रित करना बेहतर होगा। घरलू इकोनॉमी में आगे अच्छी मजबूती देखने को मिलेगा। जिसके चलते घरेलू इकोनॉमी पर आधारित कंपनियां अच्छा करती दिखेंगी। दूसरी तरफ एक्सपोर्ट पर निर्भर कंपनियों का आउटलुक अच्छा नहीं दिख रहा है। अमेरिका और यूरोजोन की इकोनॉमी की ग्रोथ रेट मल्टी-ईयर लो पर रहने की संभावना है ऐसे में एक्सपोर्ट ओरिएंटेड कंपनियों से दूर रहने की सलाह होगी।
क्या आपको लगता है कि 2023 आने वाले वर्षों में मजबूत बुल रन का आधार बनेगा? इस सवाल के जवाब में कैजाद होजदार ने कहा कि पिछले दो दशकों में भारत की नॉमिनल जीडीपी में लगभग 12 फीसदी की बढ़त देखने को मिली है। पिछले 2 दशकों में अर्निंग ग्रोथ भी 12 फीसदा के आसपास रही है। कैलेंडर वर्ष 2021 में महामारी के बाद लगे प्रतिबंधों को हटाए जाने के बाद अर्थव्यवस्था में दबी हुई मांग (पेंट अप डिमांड) के उभरने के चलते अच्छी रिकवरी देखने को मिली। इसके चलते बाजार में एक मजबूत रैली देखने को मिली और सेंसेक्स-निफ्टी पोस्ट कोविड हाई 50 फीसदी से ज्यादा ग्रोथ करते दिखे। इस उछाल के चलते भारतीय बाजार का वैल्यूएशन ऐतिहासिक औसत से ऊपर चला गया।
कुछ ही समय में बाजार हमें नई तेजी पकड़ते नजर आ सकता है
पिछले अनुभव बताते हैं कि बाजार में करेक्शन और वैल्यूशन के सामान्य स्तरों पर आने के कारण 6-8 तिमाहियों में बाजार का फुलाव खतम हो जाता है। भारतीय बाजार पिछले डेढ़ साल से करेक्शन/कंसोलीडेशन के इसी चरण में हैं। अब कुछ ही समय में बाजार हमें नई तेजी पकड़ते नजर आ सकता है। वित्त वर्ष 2024 में कंपनियों के मार्जिन में भी विस्तार की संभावना है। कमोडिटी की कीमतों में गिरावट और महंगाई में कमी से कंपनियों के मार्जिन पर से दबाव हटता दिखेगा। ऐसे में ये कहना सही होगा कि कैलेंडर ईयर 2022 की मुश्किलों के बाद अब कैलेंडर ईयर 2024 आगे की तेजी के लिए एक मजबूत बुनियाद बनाता दिखेगा। उम्मीद है कि भारत की नॉमिनल जीडीपी लंबी अवधि में 11-12 फीसदी की दर से ग्रोथ करती दिखेगी।
चालू वित्त वर्ष के लिए कैजाद होजदार की पसंदीदा निवेश थीम
टायर, सीमेंट, ऑटो और हॉस्पिटैलिटी जैसे कुछ सिक्लिकल सेक्टरों के मार्जिन में पिछली तिमाही में सुधार देखने को मिला था। मेटल, क्रूड, पेट कोक और माल ढुलाई जैसी इनपुट लागत में लगातार गिरावट की वजह से चौथी तिमाही के भी इनके आंकड़े मजबूत रहे हैं। आगे इनकी बॉटम लाइन ग्रोथ (मुनाफा) निश्चित रूप से टॉपलाइन ग्रोथ (आय) की तुलना में ज्यादा बेहतर हो सकती है। इक्विटी निवेशकों के लिए इस समय घरेलू इकोनॉमी के विकास का निर्भर कंपनियों पर ज्यादा ध्यान केंद्रित करना बेहतर होगा। घरेलू इकोनॉमी में आगे अच्छी मजबूती देखने को मिलेगा। जिसके चलते घरेलू इकोनॉमी पर आधारित कंपनियां अच्छा करती दिखेंगी।
पीएसयू स्पेस आगे भी रहेगा गुलजार
पीएसयू स्पेस काफी गुलजार नजर आ रहा है और निफ्टी पीएसई इंडेक्स पहले से ही रिकॉर्ड उच्च स्तर पर है। क्या अभी भी यहां निवेश के मौके हैं? इसका जवाब देते हुए कैजाद होजदार ने कहा कि पिछले 4-5 महीनों में कंसोलीडेशन के बाद पिछले महीने निफ्टी पीएसई इंडेक्स में काफी अच्छी तेजी देखने को मिली है। यह तेजी चालू महीने में भी जारी है। पीएसई कंपनियां मुख्या रूप से बुनियादी ढांचे, बिजली और ऊर्जा क्षेत्रों में केंद्रित हैं। हाल के बजट में बुनियादी ढांचे में सुधार पर जोर देते हुए इसके लिए 10 लाख करोड़ रुपये का आबंटन किया गया है। कई सरकारी कंपनियों के इस सरकारी खर्च से लाभ होने की संभावना है।
इसके अलावा, रेलवे की जरूरतों को पूरा करने वाली कुछ पीएसई हैं। इस सेगमेंट के लिए भी हाल के बजट में काफी बड़ा पूंजी आवंटन देखने को मिला है। डिफेंस के स्वदेशीकरण को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। इस सेक्टर में पीएसई कंपनियों का दबदबा। ऐसे में अगले 1-2 सालों से नजरिए अधिकांश PSE शेयरों में काफी अच्छी संभावनाएं दिख रही हैं।
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