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सिंगल से ज्यादा शादीशुदा लोग कमाते हैं शेयर बाजार से प्रॉफिट, SEBI की स्टडी में चौंकाने वाले खुलासे

SEBI की स्टडी में पाया गया कि शादीशुदा ट्रेडर्स, सिंगल ट्रेडर्स के मुकाबले ज्यादा प्रॉफिट कमाते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2019, वित्त वर्ष 2022 और वित्त वर्ष 2023 में शादीशुदा ट्रेडर्स का प्रदर्शन सिंगल ट्रेडर्स से बेहतर रहा है। FY23 में, 75 प्रतिशत सिंगल ट्रेडर्स को नुकसान हुआ, जबकि शादीशुदा ट्रेडर्स में यह संख्या 67 प्रतिशत थी

Moneycontrol Newsअपडेटेड Jul 29, 2024 पर 10:41 PM
सिंगल से ज्यादा शादीशुदा लोग कमाते हैं शेयर बाजार से प्रॉफिट, SEBI की स्टडी में चौंकाने वाले खुलासे
वित्त वर्ष 2023 में इंट्राडे ट्रेडिंग करने वाले हर 10 में से 7 व्यक्ति को घाटा हुआ

क्या आपका रिलेशनशिप स्टेटस आपके शेयर बाजार के मुनाफे पर असर डाल सकता है? यह सुनने में थोड़ा अजीब लग सकता है, लेकिन SEBI की ताजा स्टडी में कुछ इसी तरह के चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। इस स्टडी के मुताबिक, सिंगल की बजाय शादीशुदा लोग और पुरुषों की बजाय महिलाएं ट्रेडिंग में बेहतर प्रदर्शन करती हैं। SEBI ने इक्विटी कैश सेगमेंट में इंट्राडे ट्रेडिंग के पैटर्न की स्टडी की और पाया कि आपका रिलेशनशिप स्टेटस वास्तव में आपके ट्रेडिंग प्रदर्शन को प्रभावित कर सकता है।

शादीशुदा बनाम अविवाहित/सिंगल ट्रेडर्स

SEBI की इस स्टडी में ये पाया गया कि शादीशुदा ट्रेडर्स, सिंगल ट्रेडर्स के मुकाबले ज्यादा प्रॉफिट कमाते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2019, वित्त वर्ष 2022 और वित्त वर्ष 2023 में शादीशुदा ट्रेडर्स का प्रदर्शन सिंगल ट्रेडर्स से बेहतर रहा है। FY23 में, 75 प्रतिशत सिंगल ट्रेडर्स को नुकसान हुआ, जबकि शादीशुदा ट्रेडर्स में यह संख्या 67 प्रतिशत थी। इसके अलावा, शादीशुदा ट्रेडर्स ने औसतन सिंगल ट्रेडर्स की तुलना में अधिक ट्रेड किए, जिससे यह पता चलता है कि वे मार्केट में ज्यादा एक्टिव रहते हैं।

पुरुष बनाम महिला ट्रेडर्स

अब बात करते हैं महिला और पुरुष ट्रेडर्स की। स्टडी के अनुसार, महिला ट्रेडर्स का प्रदर्शन लगातार पुरुषों से बेहतर रहा है। वित्त वर्ष 2023 में, जिन पुरुषों का सालाना इंट्राडे टर्नओवर 1 करोड़ रुपये से अधिक था, उन्होंने औसतन 38,570 रुपये का नुकसान झेला, जबकि महिलाओं का औसत नुकसान 22,153 रुपये था। हालांकि, इंट्राडे ट्रेडिंग करने वाले कुल ट्रेडर्स में महिलाओं की संख्या वित्त वर्ष 2023 में घटकर 16% पर आ गई, जो वित्त वर्ष 2019 में 20% था।

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