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NSE की F&O बैन लिस्ट में इंडियाबुल्स हाउसिंग, डेल्टा कॉर्प और मणप्पुरम की बार-बार एंट्री, उठ रहे सवाल!

किसी स्टॉक का फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस की बैन लिस्ट में आना आमतौर पर इस बात का संकेत होता है कि बहुत सारे डेरिवेटिव ट्रेडर स्टॉक में रुचि रखते हैं। लेकिन किसी शेयर के इस बैन लिस्ट में बार-बार आने से बाजार में इस बात की चर्चा होने लगी है कि क्या कोई कार्टेल (लोगों का ग्रुप) मार्केट में जोड़-तोड़ करके किसी स्टॉक को इस लिस्ट में डलवा सकता है

Curated By: Sudhanshu Dubeyअपडेटेड Jul 21, 2023 पर 11:43 AM
NSE की F&O बैन लिस्ट में इंडियाबुल्स हाउसिंग, डेल्टा कॉर्प और मणप्पुरम की बार-बार एंट्री, उठ रहे सवाल!
जब किसी शेयर का कुल ओपन इंटरेस्ट उसके मार्केट वाइड पोजीशन लिमिट के 95 फीसदी से ज्यादा हो जाता है तो उस स्टॉक को फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस की बैन लिस्ट में डाल दिया जाता है

मनीकंट्रोल द्वारा जुटाए गए आंकड़ों से पता चलता है कि इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनेंस, डेल्टा कॉर्प और मणप्पुरम फाइनेंस उन शेयरों में से हैं जो 2023 में एनएसई की फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (एफएंडओ) प्रतिबंध सूची में सबसे ज्यादा बार शामिल हुए हैं। इंडियाबुल्स हाउसिंग 50 बार इस बैन लिस्ट में शामिल होने के साथ इस सूची में शीर्ष पर है। इसके बाद डेल्टा कॉर्प 35 बार और मणप्पुरम 33 बार इस बैन लिस्ट में शामिल हुए हैं। दूसरे तरीके से कहें तो इंडियाबुल्स का स्टॉक हर तीसरे कारोबारी सत्र में इस बैन लिस्ट में रहा है। जबकि दूसरे दो स्टॉक इस साल हर चौथे कारोबारी सत्र में फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस की बैन लिस्ट में रहे हैं।

बता दें कि जब किसी शेयर का कुल ओपन इंटरेस्ट उसके मार्केट वाइड पोजीशन लिमिट (MWPL)के 95 फीसदी से ज्यादा हो जाता है तो उस स्टॉक को फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस की बैन लिस्ट में डाल दिया जाता है। MWPL की गणना फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस कॉन्ट्रैक्टस कुल ओपन पोजीशन के आधार पर की जाती है। MWPL स्टॉक के फ्री फ्लोट मार्केट कैप से जुड़ी होती है। इसकी लिमिट पब्लिक शेयर होल्डिंग के 20 फीसदी तक सीमित रखी गई है।

एक बार जब कोई स्टॉक फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस की बैन लिस्ट में चला जाता है, तो केवल मौजूदा पोजीशन को ही काटा (स्क्वैर ऑफ) जा सकता है। स्टॉक में सामान्य ट्रेडिंग तभी शुरू होती है जब ओपन इंटरेस्ट एमडब्ल्यूपीएल के 80 फीसदी या उससे नीचे आ जाता है।

किसी स्टॉक का फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस की बैन लिस्ट में आना आमतौर पर इस बात का संकेत होता है कि बहुत सारे डेरिवेटिव ट्रेडर स्टॉक में रुचि रखते हैं। लेकिन किसी शेयर के इस बैन लिस्ट में बार-बार आने से बाजार में इस बात की चर्चा होने लगी है कि क्या कोई कार्टेल (लोगों का ग्रुप) मार्केट में जोड़-तोड़ करके किसी स्टॉक को इस लिस्ट में डलवा सकता है।

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