रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (Reliance Industries Limited) ने 56 वर्षीय वेंकटाचारी श्रीकांत (Venkatachari Srikanth) को 24 मार्च को अपना नया मुख्य वित्तीय अधिकारी (Chief Financial Officer (CFO) नियुक्त करने की घोषणा की। आरआईएल की सीएफओ के रूप में लंबे समय से सेवा कर रहे आलोक अग्रवाल (Alok Agarwal) हाल ही में 65 साल के हो गए हैं और आरआईएल के साथ 30 साल पूरे कर चुके हैं। अब अग्रवाल कंपनी के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक के वरिष्ठ सलाहकार की भूमिका निभाएंगे। ये रणनीतिक मुद्दों पर उनकी सहायता करेंगे। आरआईएल द्वारा स्टॉक एक्सचेंज को दी गई सूचना के अनुसार, दोनों नई भूमिकाएं 1 जून, 2023 से प्रभावी होंगी।
वी श्रीकांत (2011 से ज्वाइंट सीएफओ) के रूप में पिछले कुछ वर्षों से आलोक अग्रवाल के साथ सीएफओ पद की कुछ जिम्मेदारियों को साझा रहे हैं। श्रीकांत पिछले 14 सालों से आरआईएल के साथ काम कर रहे हैं। इससे पहले उन्होंने सिटी ग्रुप के साथ फॉरेक्स ट्रेडिंग और डेरिवेटिव में दो दशकों तक काम किया, बाद में हेड ऑफ मार्केट बने।
आलोक अग्रवाल IIT कानपुर और IIM अहमदाबाद के छात्र रहे हैं। वह 1993 में Reliance Industries से जुड़े और 2005 में सीएफओ बने। आरआईएल से पहले उन्होंने 12 साल तक बैंक ऑफ अमेरिका (Bank of America) के साथ काम किया था।
आरआईएल द्वारा एक्सचेंज को दी गई सूचना में कहा गया है, "बोर्ड ने कंपनी की परिवर्तनकारी यात्रा में आलोक अग्रवाल के योगदान के लिए उनकी सराहना की।"
आलोक अग्रवाल के कार्यकाल की उपलब्धियां
अग्रवाल ने पिछले 30 वर्षों में आरआईएल की कई गुना वृद्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। जब वह रिलायंस में शामिल हुए, तो रिलायंस का सालाना कारोबार 4,100 करोड़ रुपये था। इसकी बैलेंस शीट 6,100 करोड़ रुपये की थी। उनकी अगुवाई में कंपनी का रेवन्यू लगभग 240 गुना बढ़ा। RIL FY22 में वार्षिक कारोबार में 100 अरब डॉलर को पार करने वाली पहली भारतीय कंपनी बन गई। FY23 के पहले 9 महीनों में ही 90 अरब डॉलर का कारोबार कर चुकी है। सितंबर 2022 के अंत तक इसी अवधि में बैलेंस शीट का आकार 260 गुना बढ़कर 16.25 लाख करोड़ रुपये हो गया।
अग्रवाल के नेतृत्व में, रिलायंस ने कैपिटल मार्केट और कॉर्पोरेट फाइनेंल के क्षेत्र में कई अनूठी उपलब्धि हासिल की।
Reliance 1995 में S&P और Moody's जैसी अंतर्राष्ट्रीय क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों द्वारा रेटिंग प्राप्त करने वाली पहली निजी क्षेत्र की कंपनी बन गई।
रिलायंस 1997 में अपने शेयरों को डीमैटरियलाइज करने और डीमैट रूप में बोनस शेयर जारी करने वाली पहली भारतीय कंपनियों में से एक बन गई।
रिलायंस 2007 में मार्केट कैपिटलाइजेशन में भारत की सबसे बड़ी कंपनी बन गई। 2020 के मध्य में, रिलायंस 200 अरब डॉलर मार्केट कैपिटलाइजेशन को पार करने वाली भारत की पहली कंपनी बन गई। मार्केट वैल्यू के हिसाब से दुनिया की शीर्ष 40 कंपनियों में प्रवेश कर गई।
वित्त वर्ष 2015 में शुद्ध लाभ के आधार पर रिलायंस भारत की निजी क्षेत्र की सबसे बड़ी कंपनी बन गई
रिलायंस ने पांच साल 2013-2017 में 330,000 करोड़ रुपये का निवेश करके किसी भी भारतीय कॉर्पोरेट द्वारा किया जाने वाला सबसे बड़ा पूंजी निवेश कार्यक्रम किया।
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