AT1 Bonds : दो साल के मुश्किल दौर के बाद एटी1 बॉन्ड्स यानी एडिशनल टियर-1 बॉन्ड्स ने भारतीय बैंकिंग इंडस्ट्री में फिर से धमाकेदार आगाज किया है। दरअसल, दो साल पहले यस बैंक के ऐसे बॉन्ड्स को बट्टे खाते में डालने से इनवेस्टर्स को भारी नुकसान उठाना पड़ा था।
कम से पांच बैंकों ने मनीकंट्रोल के साथ बातचीत में कहा कि डिमांड बढ़ने और सिस्टम में लिक्विडिटी कम होने पर वे आने वाले दिनों में कैपिटल बेस बढ़ाने के लिए एटी1 बॉन्ड्स का बड़े स्तर पर इस्तेमाल कर सकते हैं।
दो साल पहले यस बैंक ने बिगाड़ा था बाजार
इस वित्त वर्ष में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, बैंक ऑफ बड़ोदा, एचडीएफसी बैंक और बैंक ऑफ महाराष्ट्र के लगातार आए इश्यूज के साथ अभी तक 18,000 करोड़ रुपये के एटी1 बॉन्ड की सेल्स हो चुकी है।
एक एनालिस्ट ने मनीकंट्रोल से बातचीत में कहा, AT1 bonds को 2020 में तब भरोसे के संकट का सामना करना पड़ा था, जब यस बैंक ने 8,415 करोड़ रुपये के बॉन्ड्स को बट्टे खाते में डाल दिया था। लेकिन उसके बाद बाजार खासा रिवाइव हो चुका है।
बैंक अपने कोर इक्विटी बेस को बढ़ाने के लिए लगातार एटी1 बॉन्ड लाते रहते हैं। इन पर ब्याज दर ऊंची रहती है, लेकिन इन्हें बैंक के ठप होने की स्थिति में खासा रिस्की इंस्ट्रुमेंट माना जाता है। इन्हें डिपॉजिटर्स की रक्षा के लिए ग्लोबल फाइनेंशियल क्राइसिस के बाद पेश किया गया था। इनकी कोई मैच्योरिटी डेट नहीं होती और बैंक के पास एक निश्चित पीरियड के बाद फैसला लेने का विकल्प होता है।
कई अन्य बैंक बॉन्ड लाने की तैयारी में
सूत्रों के मुताबिक, केनरा बैंक 14 सितंबर को एटी1 बॉन्ड्स के जरिये कम से कम 500 करोड़ रुपये जुटाने पर विचार कर रहा है। मुंबई की डेट एडवाइजरी फर्म रॉकफोर्ट फिनकैप के फाउंडर और मैनेजिंग पार्टनर वेंकटाकृष्णन श्रीनिवासन ने कहा, “हम Indian Bank, Bank of India, Axis Bank, ICICI Bank के एटी1 बॉन्ड्स जारी करने पर विचार करने की उम्मीद कर सकते हैं। इसके अलावा टियर 2 और इन्फ्रा बॉन्ड्स के भी विकल्प हैं। ध्यान रखना चाहिए कि इनमें से कुछ बैंकों को मौजूदा मर्जर और एक्विजिशन के दौर के चलते ज्यादा कैपिटल जुटाने की जरूरत पड़ सकती है।
श्रीनिवासन को उम्मीद है कि चालू वित्त वर्ष में बैंक एटी1 बॉन्ड्स से कम से कम 30,000 करोड़ रुपये जुटाएंगे।