Global bond index : भारत इमर्जिंग इकोनॉमीज का सबसे बड़ा बॉन्ड मार्केट है जो ग्लोबल इंडेक्सेस में कवर नहीं होता है। हालांकि, बैंकर्स का मानना है कि हालात जल्द ही बदल सकते हैं और भारत की ओर अरबों डॉलर का इनफ्लो बढ़ सकता है। यूक्रेन पर हमले के बाद बदले हालात में रूस के हाल में बॉन्ड इंडेक्सेस से बाहर होना इसकी एक वजह है।
जेपी मॉर्गन जल्द कर सकती है ऐलान
ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, मॉर्गन स्टैनली (Morgan Stanley) को उम्मीद है कि सितंबर के मध्य तक भारत को जेपी मॉर्गन एंड चेस कंपनी के इमर्जिंग मार्केट्स बॉन्ड इंडेक्स में शामिल कर लिया जाएगा। हालांकि उसकी वास्तविक एंट्री अगले साल की तीसरी तिमाही में होगी।
Goldman Sachs Group Inc को इस साल की चौथी तिमाही में घोषणा होने और 2023 की दूसरी या तीसरी तिमाही में उसके शामिल होने की उम्मीद है। दोनों ही भारत को 10 फीसदी का वेट मिलने की उम्मीद कर रहे हैं, जो इंडेक्स में एक देश के लिए अधिकतम है और इससे संभावित रूप से देश में 30 अरब डॉलर का इनफ्लो हो सकता है।
विदेशी निवेशकों के लिए भारत में पूंजी लगाना होगा आसान
ग्लोबल इंडेक्सेस में ऊंची यील्ड वाले भारतीय सॉवरेन बॉन्ड्स (Indian sovereign bonds) मिलने से विदेशी निवेशकों के लिए 1 लाख करोड़ डॉलर के डेट मार्केट वाली एशिया की तीसरी बड़ी इकोनॉमी में अपनी पूंजी लगाना आसान हो जाएगा। ऐसा बीते कई साल में कई गलत शुरुआत के बाद हो रहा है, जिनके चलते डेट इनफ्लो को लेकर सावधानी और विदेशियों के लिए टैक्स ब्रेक्स सहित कई असहमतियों की स्थिति का सामना करना पड़ा था। यूक्रेन पर हमले के चलते जेपी मॉर्गन के रूस को बाहर करने के बाद इंडेक्स कंपाइलर्स भारतीय डेट से उसकी जगह भरने के लिए प्रोत्साहित हुए हैं।
भारत से इंडेक्स को मिलेगा जरूरी डायवर्सिफिकेशन
लोम्बार्ड ओडियर (सिंगापुर) लि. में पोर्टफोलियो मैनेजर (एशिया) और ईएम डेट निवेदिता सुनील ने कहा, “इकोनॉमी के अलग स्ट्रक्चर को देखते हुए भारत जीबीआई-ईएम इंडेक्स (GBI-EM index) जरूरी डायवर्सिफिकेशन की पेशकश करेगा और लॉन्ग टर्म के लिहाज से इंडेक्स में यह एक मजबूत बदलाव होगा।” उन्होंने कहा, हमने इंडेक्स प्रोवाइडर से बात की है और हम व्यापक रूप से इसका समर्थन करते हैं।