डॉलर (Dollar) के मुकाबले रुपया (Rupee) में पिछले कुछ हफ्तों में काफी गिरावट आई है। यह निचले स्तर पर पहुंच गया है। वैश्विक अर्थव्यवस्था में कमजोरी को देखते हुए सुरक्षित माने जाने वाले एसेट्स में निवेश बढ़ा है। विदेश फंड्स (Foreign Funds) इंडियन स्टॉक मार्केट्स से पैसे निकाल रहे हैं। उधर, व्यापार घाटा बढ़ा है। इसका असर रुपया पर पड़ा है।
गिरावट के बावजूद दूसरी एशियाई करेंसी के मुकाबले रुपया का प्रदर्शन अच्छा रहा है। RBI डॉलर के मुकाबले रुपया में जरूरत से ज्यादा उतार-चढ़ाव को रोकने के लिए पूरी तरह से तैयार है। इंडिया अब उन 'Fragile Five' इकोनॉमीज का हिस्सा भी नहीं है, जिनसे 2013 में काफी पूंजी बाहर चली गई थी और करेंसी में बड़ी गिरावट आई थी।
आने वाले समय में रुपये की चाल कई चीजों पर निर्भर करेगी। इनमें रूस-यूक्रेन वॉर, क्रूड ऑयल प्राइस और कमोडिटी की कीमतें शामिल हैं। रुपये पर यूरोप और अमेरिका की अर्थव्यस्था में सुस्ती का असर भी पड़ेगा। कई जानकारों ने अमेरिकी अर्थव्यवस्था के हल्की मंदी में जाने का अनुमान जताया है।
अगर आगे स्थितियां अनुकूल बनती हैं तो रुपया मजबूती दिखा सकता है। यह डॉलर के मुकाबले 76 - 76.50 के स्तर पर आ सकता है। इसके लिए क्रूड ऑयल की कीमतों में नरमी जरूरी है। रूस-युक्रेन युद्ध उग्र रूप धारण नहीं करना चाहिए। उधर, अमेरिकी अर्थव्यवस्था ज्यादा मंदी में नहीं जानी चाहिए। आखिर में फूड और कमोडिटी की कीमतें में और उछाल नहीं आना चाहिए।
अगर हालात बेहतर हो जाते है तो भी RBI डॉलर के मुकाबले रुपया को ज्यादा मजबूत नहीं होने देगा। कोटक सिक्योरिटीज में करेंसी एंड इंटरेस्ट रेट डेरिवेटिव के वाइस प्रेसिडेंट अनिंद्य बनर्जी ने कहा, "यह बिल्कुल स्पष्ट है कि RBI का रुख कैसा रहेगा। डॉलर में कमजोरी आने पर दूसरी करेंसी के मुकाबले रुपया में ज्यादा मजबूती आएगी।"
IFA Global के फाउंडर और सीईओ अभिषेक गोयनका ने कहा कि रुपया के 77.50 या 78 के स्तर पर पहुंचते ही RBI डॉलर खरीदना शुरू कर देगा। इसका मतलब है कि वह रुपया को ज्यादा मजबूत नहीं होने देगा।
उधर, अगर स्थितियां प्रतिकूल रहती हैं तो रुपया में गिरावट जारी रह सकती है। इससे डॉलर के मुकाबले रुपया की वैल्यूएशन में कमी आएगी। अभी कुछ लोग मानते हैं कि डॉलर के मुकाबले रुपया की वैल्यू ज्यादा है। बीते कुछ समय में डॉलर-रुपया की जोड़ी में सबसे कम उतार-चढ़ाव दिखा है। इससे RBI के फॉरेन एक्सचेंज मार्केट के कुशल मैनेजमेंट का पता चलता है।
कुछ एक्सपर्ट्स का यह भी कहना है कि अगर आगे हालात कमजोर बने रहते हैं तो रुपया 83-83.50 के स्तर तक जा सकता है। माना जाता है कि RBI ने पिछले छह हफ्तों में स्पॉट और फॉरवर्ड मार्केट में 30 से 40 अरब डॉलर की बिकवाली की है।