केंद्र सरकार को उम्मीद है कि आने वाले दिनों में ट्रेजरी बिल (T-bill) के जरिए कर्ज लेना सस्ता होगा। सरकार के एक सूत्र ने इस बारे में बताया। एक साल से ज्यादा समय में पहली बार 10 साल के बेंचमार्क बॉन्ड की यील्ड घटकर 7 फीसदी के नीचे आ जाने के बाद उन्होंने यह उम्मीद जताई। 4 मई को शुरुआती कारोबार में 10 साल के बेंचमार्क बॉन्ड (Benchmark bond) की यील्ड घटकर 6.9 फीसदी रह गई। 8 अप्रैल, 2022 के बाद पहली बार ऐसा हुआ। सूत्र ने नाम जाहिर नहीं करने की शर्त पर कहा कि वह चाहते हैं कि 10 साल के बेंचमार्क बॉन्ड की यील्ड 7 फीसदी से नीचे बनी रहे। इनफ्लेशन में नरमी के संकेत का असर बॉन्ड यील्ड पर पड़ा है।
सरकारी बॉन्ड की यील्ड में कमी के संकेत
सूत्र ने बताया कि हमें कर्ज लेने की कॉस्ट में कमी आने की उम्मीद है। यह जरूरी है और 10 साल के बेंचमार्क बॉन्ड की यील्ड का नीचे आना जरूरी है। हालांकि, पिछले कुछ दिनों में सरकारी बॉन्ड की यील्ड में तो कमी आई है, लेकिन ट्रेजरी बिल (T-bill) की यील्ड स्थिर बनी हुई है। पिछले महीने RBI के इंटरेस्ट रेट नहीं बढ़ाने के फैसले के बाद इसमें कमी देखने को मिली थी। 3 मई को 91 दिन से 364 दिन के ट्रेजरी बिल की यील्ड 6.9 से 7 फीसदी की बीच थी। यह पिछले दो हफ्तों में इसी रेंज में बनी रही है।
फिस्कल डेफिसिट का टारगेट हासिल होने की उम्मीद
इस बीच, सरकार को फाइनेंशियल ईयर 2022-23 के फिस्कल डेफिसिट का 6.4 फीसदी टारगेट हासिल हो जाने की उम्मीद है। इसकी वजह टैक्स कलेक्शन में उछाल और सरकार के खर्च पर नियंत्रण है। सूत्र ने बताया कि सरकार के रेवेन्यू और खर्च के बीच के अंतर को पूरा कर लिया जाएगा। हालांकि, सरकार के स्मॉल सेविंग्स फंड्स में थोड़ी कमी दिख सकती है। सरकार को अगले ग्रीन बॉन्ड ऑफरिंग को अच्छा greenium मिलने की उम्मीद है। ग्रीनियम का मतलब उस प्रीमियम से है जिसे इनवेस्टर्स सस्टेनेबल इम्पैक्ट के लिए चुकाने को तैयार होते हैं। सरकार को अपने पहले इश्यू में 5-6 बेसिस प्वाइंट्स ग्रीनियम मिला था। यह अगले ऑक्शन में घटकर 3-4 बेसिस प्वाइंट्स पर आ गया था।
बॉन्ड की कीमत और उसकी यील्ड में विपरीत संबंध होता है। बॉन्ड की कीमत गिरने पर उसकी यील्ड बढ़ जाती है। इसी तरह बॉन्ड की कीमत बढ़ने पर उसकी यील्ड घट जाती है।