Indian bonds : भारत के 10 साल के बॉन्ड की यील्ड (bond yield) गुरुवार, 6 अक्टूबर को 10 बेसिस प्वाइंट्स यानी 0.10 फीसदी उछलकर तीन महीने के हाई पर पहुंच गई। हाल ही में जेपी मॉर्गन (JPMorgan) ने निवेश से जुड़ी बाधाओं का हवाला देते हुए भारतीय बॉन्ड्स को अपने इमर्जिंग मार्केट डेट इंडेक्स (emerging market debt index) से जोड़ने से परहेज किया था।
21 जून के बाद के उच्चतम स्तर पर यील्ड
10 साल के बॉन्ड की यील्ड 7.46 फीसदी के स्तर पर पहुंच गई, जो 21 जून के बाद का उच्चतम स्तर है। बॉन्ड यील्ड्स और कीमतें एक दूसरे से विपरीत दिशा में जाती हैं।
इस महीने की शुरुआत में FTSE इंडाइसेज का प्रबंधन करने वाले लंदन स्टॉक एक्सचेंज ग्रुप (London Stock Exchange Group) ने कहा था कि वह एफटीएसई इमर्जिंग मार्गेट्स गवरमेंट बॉन्ड इंडेक्स में शामिल करने के लिए अभी भारतीय बॉन्ड्स (Indian bonds) को वाच के तहत बनाए रखेगा।
तेल की कीमतों में उछाल से भी बना हुआ है दबाव
बॉन्ड यील्ड्स पर अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर क्रूड ऑयल की कीमतों में मजबूती के चलते भी दबाव बना हुआ है। OPEC+ के ग्लोबल मार्केट में क्रूड की सप्लाई में सख्ती के साथ ही प्रति दिन 20 लाख बैरल उत्पादन में कमी पर राजी होने से तेल की कीमतों में लगातार चौथे सेशन में मजबूती बनी हुई है। वहीं ब्रेंट तीन हफ्ते के हाई पर पहुंच गया। उत्पादन में यह 2020 के बाद सबसे बड़ी कटौती है।
वहीं, रुपया 0.14 फीसदी कमजोर होकर डॉलर की तुलना में 81.63 पर कारोबार कर रहा है। भारतीय करेंसी 81.54 पर खुली और क्रमशः 81.49 और 81.66 का ऊपरी और निचला स्तर छूआ।