वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) ने कहा है कि ग्लोबल फैक्टर्स (Global Factors) की वजह से रुपया में गिरावट आई है। इनमें क्रूड ऑयल की कीमतों में उछाल, विदेशी फंडों की बिकवाली और बदलती वित्तीय स्थितियां शामिल हैं। उन्होंने लोकसभा में एक सवाल के लिखित जवाब में यह बात कही।
उन्होंने कहा, "रूस-यूक्रेन लड़ाई, क्रूड ऑयल की कीमतों में उछाल और बदलती ग्लोबल फाइनेंशियल स्थितियां डॉलर के मुकाबले रुपया की गिरावट की मुख्य वजहें हैं।" उन्होंने कहा कि ब्रिटिश पाउंड, जापानी येन और यूरो में रुपया के मुकाबले ज्यादा गिरावट आई है। यही वजह है कि इन करेंसीज के मुकाबले 2022 में रुपया में मजबूती आई है।
वित्तमंत्री ने कहा कि रुपया के कमजोर होने से एक्सपोर्ट मार्केट में इंडिया की प्रतिस्पर्धी क्षमता बढ़ेगी, साथ ही इससे इंपोर्ट करना महंगा हो जाएगा। उन्होंने कहा कि RBI फॉरेन एक्सचेंज मार्केट पर लगातार नजर रखता है और ज्यादा उतार-चढ़ाव होने पर हस्तक्षेप करता है। इंडिया ने हाल के महीनों में इंटरेस्ट रेट बढ़ाया है। इससे रेजिडेंट्स और नॉन-रेजिडेंट्स के लिए रुयया रखना अट्रैक्टिव हुआ है।
RBI ने रुपया को सहारा देने के लिए कई उपाय किए हैं। पिछले कुछ सत्रों में डॉलर के मुकाबले रुपया गिरकर अब तक के सबसे निचले स्तर पर आ गया है। यह अब भी डॉलर के मुकाबले 80 रुपये के मनोवैज्ञानिक स्तर के करीब बना हुआ है।
सीतारमण ने कहा कि विकसित देशों खासकर अमेरिका में सख्त मौद्रिक नीति की वजह से विदेशी निवेशक उभरते बाजारों से पैसे निकाल रहे हैं। उन्होंने कहा कि विदेशी पोर्टफोलियो इनवेस्टर्स इस साल अब तक इंडियन स्टॉक मार्केट से 14 अरब डॉलर निकाल चुके हैं।
एक्सपर्ट्स का कहना है कि आने वाले वक्त में भी डॉलर के मुकाबले रुपया पर दबाव बना रह सकता है। इस साल रुपया डॉलर के मुकाबले 6 फीसदी से ज्यादा गिर चुका है। उधर, दुनिया की प्रमुख करेंसीज के मुकाबले डॉलर में मजबूती आई है।
अमेरिका में फेडरल रिजर्व मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी की बैठक में इंटरेस्ट रेट में 0.75 फीसदी की वृद्धि कर सकता है। अमेरिका में जून में इनफ्लेशन बढ़ने के बाद फेडरल रिजर्व के इंटरेस्ट रेट बढ़ाने की उम्मीद बढ़ गई है। अगर अमेरिका में इंटरेस्ट रेट बढ़ता है तो इससे रुपया पर दबाव और बढ़ जाएगा। इन वजहों से आने वाले समय में डॉलर के मुकाबले रुपया पर दबाव बना रहेगा।