आरबीआई ने रुपये के लिए नहीं तय किया कोई खास लेवल लेकिन उतार-चढ़ाव पर नियत्रंण के लिए हैं मुस्तैद : शक्तिकांत दास

आरबीआई गर्वनर ने आगे कहा कि ग्लोबल इकोनॉमी की स्थिति चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। खराब ग्लोबल हालात के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था बेहतर स्थिति में है

अपडेटेड Jul 22, 2022 पर 1:48 PM
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इस साल अब तक डॉलर के मुकाबले रुपये में 7 फीसदी की कमजोरी आई है। हालांकि आरबीआई के हस्तक्षेप से हाल के कारोबारी सत्रों में रुपये की गिरावट थोड़ा थमी है

आरबीआई के गर्वनर शक्तिकांता दास ने आज आए अपने बयान में कहा है कि सेंट्रल बैंक रुपये के लिए कोई खास लेवल नहीं तय कर रखा है लेकिन हम भारतीय करेंसी में होने वाले उतार-चढ़ाव को रोकने के लिए मुस्तैद है। शक्तिकांता ने यह बातें मुंबई में हुए एक बैंकिंग इवेंट के दौरान कही।

उन्होंने आगे कहा कि रुपये के लिए हमने अपने दिमाग में कोई खास लेवल नहीं तय कर रखा है। हम इसके क्रमिक विकास को पक्का करना चाहते हैं लेकिन रुपये में किसी असामान्य उतार-चढ़ाव के प्रति हमारी जीरो टॉलरेंस की नीति है। उन्होंने आगे कहा कि हम बाजार में स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए डॉलर की सप्लाई कर रहे हैं और जब भी रुपया वोलेटाइल होगा बाजार में हस्तक्षेप करेंगे ।

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उन्होंने इस बात की और संकेत किया है कि एक्सटर्नल बॉरोइंग का अनहेज्ड हिस्सा बाजार के अनुमान से काफी कम है। इस समय डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया अपने रिकॉर्ड निचले स्तर पर नजर आ रहा है और यह डॉलर के मुकाबले 80 के नीचे भी चला गया है। इस साल अब तक डॉलर के मुकाबले रुपये में 7 फीसदी की कमजोरी आई है। हालांकि आरबीआई के हस्तक्षेप से हाल के कारोबारी सत्रों में रुपये की गिरावट थोड़ा थमी है।

खराब ग्लोबल हालात के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था बेहतर स्थिति में

इस इवेंट में बोलते हुए आरबीआई गर्वनर ने आगे कहा कि ग्लोबल इकोनॉमी की स्थिति चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। खराब ग्लोबल हालात के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था बेहतर स्थिति में है। हालात पर RBI की नजर बनी हुई है और हम समय पर जरूरी कदम उठाएंगे। इकोनॉमी में मजबूत रिकवरी आती दिखी है। वित्तीय घाटा भी कम हुआ है।

विदेशी मुद्रा भंडार पर बात करते हुए उन्होंने आगे कहा कि इंपोर्ट और ECB ब्याज भुगतान से डॉलर की कमी आई है। आरबीआई डॉलर का रिजर्व से भुगतान कर रहा है। डॉलर के मुकाबले रुपए की स्थिति पर RBI की नजर बनी हुई है। हमारी कोशिश होगी कि रुपए में ज्यादा Volatility न आए।

उन्होंने आगे कहा कि बाजार में लिक्विडिटी की स्थिति बेहतर है। कुछ बैंको ने जमा दरें बढ़ाना शुरु किया था। जब ब्याज दरें बढ़ती है तो बचत खाते पर भी ब्याज दर ज्यादा मिलता है।

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