डॉलर के मुकाबले लगातार छठे दिन गिरा रुपया, जानिए आगे कैसी रहेगी इंडियन करेंसी की सेहत

एनालिस्ट्स और इकोनॉमिस्सट्स का कहना है कि डॉलर के मुकाबले रुपया में दबाव बने रहने की उम्मीद है। इसके आज या अगले हफ्ते 80 के स्तर को पार कर जाने की उम्मीद है। अमेरिका में जून में इनफ्लेशन 9.1 फीसदी पर पहुंच गया। यह साल 1981 के बाद सबसे ज्यादा है। इससे रुपया पर दबाव बढ़ने की उम्मीद है

अपडेटेड Jul 15, 2022 पर 5:43 PM
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इस साल (2022) डॉलर के मुकाबले रुपया करीब 7 फीसदी गिर चुका है।

शुक्रवार को रुपया (Rupee) में लगातार छठे दिन कमजोरी देखने को मिली। यह डॉलर (Dollar) के मुकाबले अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है। शुक्रवार सुबह डॉलर के मुकाबले रुपया 79.95 के स्तर पर पहुंच गया। गुरुवार को यह 79.87 के स्तर पर बंद हुआ था।

एनालिस्ट्स और इकोनॉमिस्सट्स का कहना है कि डॉलर के मुकाबले रुपया में दबाव बने रहने की उम्मीद है। इसके आज या अगले हफ्ते 80 के स्तर को पार कर जाने की उम्मीद है। अमेरिका में जून में इनफ्लेशन 9.1 फीसदी पर पहुंच गया। यह साल 1981 के बाद सबसे ज्यादा है। इससे रुपया पर दबाव बढ़ने की उम्मीद है।

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एनालिस्ट्स का यह भी कहना है कि फिलहाल डॉलर के मुकाबले रुपया 80-81 के आसपास बना रहेगा। इस साल (2022) डॉलर के मुकाबले रुपया करीब 7 फीसदी गिर चुका है। हालांकि, दूसरे उभरते बाजारों की करेंसी में भी इस साल गिरावट आई है। पिछले तीन महीने में दक्षिण अफ्रीका की करेंसी रैंड और ब्राजील की करेंसी रियल में 9 फीसदी गिरावट आई है।

रेलिगेयर ब्रोकिंग में वाइस प्रेसिडेंट एस सचदेवा ने कहा कि चूंकि रुपया एक स्टेबल करेंसी है, जिससे इसमें और गिरावट की गुंजाइश है। यह जल्द डॉलर के मुकाबले 81 के स्तर तक जा सकता है। दरअसल, यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद वैश्विक हालात में बड़ा बदलाव आया है। इनवेस्टर्स डॉलर जैसी सुरक्षित करेंसी में दिलचस्पी दिखा रहे हैं।

एनालिस्ट्स का यह कहना है कि RBI ने रुपया को सहारा देने के लिए कई कदम उठाए हैं। उधर, अमेरिका में बॉन्ड यील्ड के रूप में रिटर्न काफी बढ़ा है। यह कई मामलों में इंडिया में निवेश से मिलने वाले रिटर्न से ज्यादा हो गया है। इस वजह से ग्लोबल इनवेस्टर्स में इंडिया में निवेश करने में दिलचस्पी घटी है।

अमेरिका में फेडरल रिजर्व मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी की बैठक में इंटरेस्ट रेट में 0.75 फीसदी की वृद्धि कर सकता है। अमेरिका में जून में इनफ्लेशन बढ़ने के बाद फेडरल रिजर्व के इंटरेस्ट रेट बढ़ाने की उम्मीद बढ़ गई है। अगर अमेरिका में इंटरेस्ट रेट बढ़ता है तो इससे रुपया पर दबाव और बढ़ जाएगा। इन वजहों से आने वाले समय में डॉलर के मुकाबले रुपया पर दबाव बना रहेगा।

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