अगले दशक में डॉलर के मुकाबले रुपया होगा मजबूत, 2030 तक 70 का स्तर मुमकिन: कैपिटल इकोनॉमिक्स

यूएस फेड की तरफ से मॉनिट्ररी पॉलिसी में कड़ाई जारी रहने की उम्मीद ने रुपये को रिकॉर्ड लो की तरफ ठकेल दिया है। रुपये की इस भारी गिरावट को रोकने के लिए रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया को आगे आना पड़ा और उसने डॉलर की बिक्री करके रुपये को सहारा दिया

अपडेटेड Sep 01, 2022 पर 5:39 PM
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एक बार डॉलर में तेजी लाने वाले सिक्लिकल फैक्टर्स के ठंडे पड़ जाने के बाद रुपये में मजबूती का दौर फिर से शुरू होगी

Capital Economics के मुताबिक 29 अगस्त को डॉलर के मुकाबले अपना ऑल टाईम लो छूने वाला भारतीय रुपया अगले दशक में मजबूत बनकर उभरेगा। कैपिटल इकोनॉमिक्स के 31 अगस्त 2022 को जारी नोट में इसके एसिस्टेंट इकोनॉमिस्ट एडम होएज (Adam Hoyes) ने कहा है कि भारतीय रुपया इस साल डॉलर के मुकाबले कमजोरी का अपना लंबा दौर जारी रखे हुए है। ये डॉलर के मुकाबले 80 के लेवल तक पहुंच गया। नियर टर्म में रुपये में अभी और कमजोरी आ सकती है।

इसी नोट में उन्होंने आगे कहा कि इस गिरावट के बावजूद ऐसे कई कारण हैं कि जिनके आधार पर हम कह सकते हैं कि अगले दशक में डॉलर के मुकाबले रुपया टिकाऊ बढ़त दिखाता नजर आएगा। हमारा मानना है कि प्रोडक्टिविटी में मजबूत ग्रोथ, भारत के ट्रेड में बढ़त और दोनों देशों के बीच महंगाई के घटते अंतर के चलते 2030 तक डॉलर के मुकाबले रुपया 70 के आसपास आ जाएगा।

गौरतलब है कि यूएस फेड की तरफ से मॉनिट्ररी पॉलिसी में कड़ाई जारी रहने की उम्मीद ने रुपये को रिकॉर्ड लो की तरफ ठकेल दिया है। रुपये की इस भारी गिरावट को रोकने के लिए रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया को आगे आना पड़ा और उसने डॉलर की बिक्री करके रुपये को सहारा दिया।


रिजर्व बैंक ने रुपये के लिए कोई खास लेवल तय नहीं कर रखा है लेकिन वह स्पॉट, फॉरवर्ड और फ्यूचर मार्केट में रुपये की वौलेटिलिटी पर नियत्रंण करना चाहता है। नीति आयोग के पूर्व वाइस चेयरमैन अरविंद पनघड़िया का कहना है कि कहना है कि दूसरे करेंसियों की तुलना में रुपये के ओवरवैल्यूएशन को सही स्तर पर लाने के लिए रुपये में अभी और गिरावट की जरूरत है।

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कैपिटल इकोनॉमिक्स के एक्सपर्ट्स के कहना है कि रुपये में गिरावट का यह ट्रेंड नियर टर्म में जारी रहेगा। इसकी वजह यह है कि डॉलर की रैली आगे भी कायम रहेगी। लेकिन हमारा मानना है कि रिजर्व बैंक के पास रुपये ने किसी तेज और भारी गिरावट से निपटने के लिए क्षमता और इच्छा शक्ति दोनों है। एक बार डॉलर में तेजी लाने वाले सिक्लिकल फैक्टर्स के ठंडे पड़ जाने के बाद रुपये में मजबूती का दौर फिर से शुरू होगी।

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