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Indian Oil जैसे OMCs स्टॉक्स में नहीं आया जोश, रुपये की कमजोरी पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी पर भारी

लंबे समय बाद कच्चे तेल में लगातार उबाल में पेट्रोल और डीजल के भाव में अभी हाल ही में प्रति लीटर ₹3 की बढ़ोतरी की गई। हालांकि अब सामने आ रहा है कि रुपये की कमजोरी के चलते इंडियन ऑयल (Indian Oil), एचपी (HP) और भारत पेट्रोलियम (Bharat Petroleum) के शेयरों में जोश नहीं आ पा रहा। जानिए कि रुपये की कमजोरी दबाव क्यों डाल रही है और आगे क्या रुझान है

Edited By: Jeevan Deep Vishawakarmaअपडेटेड May 18, 2026 पर 8:57 AM
Indian Oil जैसे OMCs स्टॉक्स में नहीं आया जोश, रुपये की कमजोरी पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी पर भारी
एसबीआई रिसर्च की एक रिपोर्ट के मुताबिक पेट्रोल और डीजल की कीमतों में प्रति लीटर ₹3 की बढ़ोतरी से वित्त वर्ष 2026-27 में OMCs को लगभग ₹52,700 करोड़ की रिकवरी में मदद मिल सकती है।

पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी के बावजूद इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (Indian Oil Corporation), हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (Hindustan Petroleum Corporation Limited- HPCL), भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (Bharat Petroleum Corporation Limited- BPCL) जैसी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) के शेयरों में जोश नहीं आया। मार्केट एनालिस्ट्स का कहना है कि पेट्रोल-डीजल की कीमतों में प्रति लीटर ₹3 की बढ़ोतरी कर खुदरा तेल बेचने वाली कंपनियों को जो राहत दी गई थी, उसका एक बड़ा हिस्सा तो रुपये में तेज गिरावट ही खत्म कर रही है। इन कंपनियों के शेयर ईरान और अमेरिका के बीच की जंग में अब तक करीब 30% टूट चुके हैं। वहीं डॉलर के मुकाबले रुपया 96 के पार जाने से आयात पर खर्च बढ़ने और फ्यूल मार्केटिंग मार्जिन घटने की चिंताएं और बढ़ गई हैं।

पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी सिर्फ आंशिक राहत

एसबीआई रिसर्च की एक रिपोर्ट के मुताबिक पेट्रोल और डीजल की कीमतों में प्रति लीटर ₹3 की बढ़ोतरी से वित्त वर्ष 2026-27 में OMCs को लगभग ₹52,700 करोड़ की रिकवरी में मदद मिल सकती है। हालांकि रिपोर्ट में यह भी अनुमान लगाया गया है कि अगर कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं, तो OMCs का कुल नुकसान फिर भी लगभग ₹3.6 लाख करोड़ रह सकता है। इसका मतलब है कि पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी से इनके घाटे का सिर्फ 15% के करीब ही कवर हो पाएगा।

बता दें कि दुनिया भर में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल के बावजूद पेट्रोल-डीजल की कीमतों में लंबे समय तक कोई बड़ा बदलाव नहीं होने के चलते तेल बेचने वाली कंपनियों का घाटा तेजी से बढ़ा। इस बार जो बढ़ोतरी की गई है, वह लगभग चार साल बाद हुई। कच्चा तेल अमेरिका और ईरान के बीच जंग के चलते 50% से अधिक बढ़ चुका है। केंद्रीय पेट्रोलियम मंत् हरदीप सिंह पुरी ने हाल ही में कहा था कि कच्चे तेल की महंगाई से OMCs को हर दिन लगभग ₹1,000 करोड़ का नुकसान हो रहा है।

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