सऊदी अरब ने एशियाई ग्राहकों के लिए बड़ा दांव खेला है। सरकारी तेल कंपनी Saudi Aramco ने अगस्त के लिए अपने सबसे ज्यादा बिकने वाले Arab Light Crude की कीमत में 11 डॉलर प्रति बैरल की कटौती कर दी है। यह कम से कम 26 साल में सबसे बड़ी कटौती मानी जा रही है।
सऊदी अरब ने एशियाई ग्राहकों के लिए बड़ा दांव खेला है। सरकारी तेल कंपनी Saudi Aramco ने अगस्त के लिए अपने सबसे ज्यादा बिकने वाले Arab Light Crude की कीमत में 11 डॉलर प्रति बैरल की कटौती कर दी है। यह कम से कम 26 साल में सबसे बड़ी कटौती मानी जा रही है।
अब कंपनी एशिया के ग्राहकों को Arab Light क्षेत्रीय बेंचमार्क के मुकाबले 1.50 डॉलर प्रति बैरल की छूट पर बेचेगी। दिलचस्प बात यह है कि Bloomberg के सर्वे में एनालिस्टों ने औसतन 8 डॉलर प्रति बैरल की कटौती का अनुमान लगाया था। लेकिन Saudi Aramco ने उससे भी बड़ी कटौती कर दी।
आखिर कीमत घटाने की जरूरत क्यों पड़ी?
इसकी सबसे बड़ी वजह है कच्चे तेल की बढ़ती सप्लाई। जून के बीच से ही तेल की कीमतों में लगातार गिरावट आ रही है। इस दौरान अमेरिका और ईरान के बीच संघर्षविराम हुआ। इसके बाद Strait of Hormuz से जहाजों की आवाजाही फिर सामान्य होने लगी।
जब तेल की सप्लाई आसान हुई, तो बाजार में कीमतों पर दबाव बढ़ गया। इसी का असर Brent Crude पर भी दिखा। इसकी कीमत गिरकर करीब 72 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई। यानी लगभग वहीं, जहां यह फरवरी के आखिर में थी।
मिडिल ईस्ट से तेजी से बढ़ रही है सप्लाई
मध्य पूर्व से अब पहले के मुकाबले ज्यादा तेल बाजार में आ रहा है। युद्ध के दौरान Saudi Aramco ने फारस की खाड़ी के Ras Tanura बंदरगाह से निर्यात कम कर दिया था। उस समय कंपनी ने ज्यादातर तेल Yanbu बंदरगाह के जरिए भेजा था, क्योंकि Strait of Hormuz में आवाजाही बुरी तरह प्रभावित थी।
अब हालात बदल चुके हैं। समुद्री यातायात फिर सामान्य हो रहा है। ऐसे में Aramco ने Ras Tanura से भी निर्यात बढ़ा दिया है। एक समय यह युद्ध शुरू होने से पहले के स्तर के करीब 90% तक पहुंच गया।
OPEC+ ने भी बढ़ाया उत्पादन
तेल बाजार पर दबाव बढ़ने की एक और वजह OPEC+ का फैसला है। इस समूह की अगुवाई सऊदी अरब और रूस कर रहे हैं। OPEC+ ने अगस्त के लिए एक बार फिर उत्पादन बढ़ाने का फैसला किया है।
युद्ध के दौरान कई खाड़ी देशों के लिए उत्पादन बढ़ाना आसान नहीं था, क्योंकि Hormuz के रास्ते तेल भेजने में दिक्कत थी। अब समुद्री रास्ता सामान्य हो रहा है। ऐसे में सऊदी अरब, इराक और कुवैत जैसे देश अपने बढ़े हुए उत्पादन कोटे का पूरा फायदा उठा सकेंगे।
एनालिस्टों का मानना है कि OPEC+ के इस फैसले से साफ संकेत मिलता है कि फिलहाल संगठन अपने सदस्य देशों को ज्यादा तेल निकालने से नहीं रोकना चाहता। अगर सप्लाई इसी तरह बढ़ती रही, तो आने वाले महीनों में कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव बना रह सकता है।
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