भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) डीवाई चंद्रचूड़ (DY Chandrachud) की अगुवाई वाली सुप्रीम कोर्ट की पीठ दिल्ली उच्च न्यायालय की खंडपीठ के आदेश के खिलाफ बंद पड़ी एयरलाइन गो फर्स्ट की अपील पर सुनवाई करेगी। बता दें कि दिल्ली उच्च न्यायालय की खंडपीठ (डिवीजन बेंच) के आदेश में एयरलाइन के पट्टेदारों को विमान का निरीक्षण करने की अनुमति देने वाले सिंगल जज के आदेश को बरकरार रखा गया था। गो फर्स्ट के आरपी (Resolution Professional) ने 2 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट में दिल्ली उच्च न्यायालय की डिवीजन बेंच के आदेश के खिलाफ अपील दायर की थी।
3 अगस्त को गो फर्स्ट के आरपी का प्रतिनिधित्व करने वाले वरिष्ठ वकील रामजी श्रीनिवासन ने दिल्ली उच्च न्यायालय को सुप्रीम कोर्ट में अपील के बारे में सूचित किया। यह पट्टा देने वालों की रिट याचिकाओं की अंतिम सुनवाई से पहले हुआ है। बता दें कि गो फर्स्ट को पट्टे पर विमान देने वाले विमानों का पंजीकरण रद्द करने के लिए डीजीसीए के खिलाफ निर्देश देने की मांग कर रहे हैं।
12 जुलाई के डिवीजनल बेंच के आदेश में सिंगल जज के उस आदेश को भी बरकरार रखा गया था। जिसमें गो फर्स्ट के रेजोल्यूशन प्रोफेशनल (आरपी) को पट्टादाताओं (lessors) की स्पष्ट अनुमति के बिना पट्टे पर दिए गए विमान के किसी भी पार्ट या पुर्जे को हटाने, बदलने या बाहर ले जाने से रोक दिया गया था। हालांकि, डिवीजन बेंच के आदेश ने गो फर्स्ट को विमान का रखरखाव जारी रखने की अनुमति दे दी थी। इसके अलावा इस आदेश में अदालत ने डायरेक्टर जनरल ऑफ सिविल एविएशन (डीजीसीए) को पट्टादाताओं (lessors)के अधिकारों और चिंताओं को ध्यान में रखते हुए गो फर्स्ट की बहाली योजना (resumption plan) पर आगे बढ़ने के निर्देश भी दिए थे।
5 जुलाई को, दिल्ली हाई कोर्ट की सिंगल जज वाली बेंच ने पट्टादाताओं (lessors)को अपने 30 पट्टे पर दिए गए विमानों और उनके कलपुर्जों की महीने में दो बार निरीक्षण और मेंटेनेंस से जुड़े काम करने की अनुमति दी। आदेश में गो फर्स्ट के सोल्यूशन प्रोवाइडरों और कर्मचारियों को पट्टादाताओं की स्पष्ट अनुमति के बिना पट्टे पर दिए गए विमान के किसी भी हिस्से या कलपुर्जे को हटाने, बदलने या बाहर ले जाने से भी प्रतिबंधित कर दिया गया था।
गौरतलब है कि वित्तीय संकट के दौर से गुजर रही गो फर्स्ट को पेमब्रोक एविएशन, एक्सीपिटर इन्वेस्टमेंट्स एयरक्राफ्ट 2 लिमिटेड, ईओएस एविएशन, और एसएमबीसी एविएशन ने पट्टे पर विमान दे रखे हैं। इन पट्टेदारों ने दिल्ली हाई कोर्ट में एक रिट दायर की है जिसमें गो फर्स्ट को पट्टे पर दिए गए विमानों को पट्टे से मुक्त करने के निर्देश देने की मांग की गई है।
उधर 22 मई को, नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (एनसीएलएटी) ने दिवालियापन के लिए गो फर्स्ट की याचिका को स्वीकार करने के नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) के आदेश को बरकरार रखा है।
10 मई को, दिल्ली में एनसीएलटी की प्रींसिपल बेंच ने दिवाला समाधान प्रक्रिया (insolvency resolution process) शुरू करने के लिए गो फर्स्ट की स्वैच्छिक याचिका स्वीकार कर ली। जिसके चलते ट्रिब्यूनल ने एक इनसॉल्वेंसी रिजोल्यूशन प्रोफेशनल (आईआरपी) की नियुक्ति करते हुए कंपनी बोर्ड को निलंबित कर दिया और एयरलाइन के वित्तीय दायित्वों पर भी मोरेटोरियम ( कुछ समय को लिए रोक ) का ऐलान किया। मोरोटोरियम (moratorium) का मतलब होता है कि इस अवधि में कर्जधारक को मासिक किस्त चुकाने की आवश्यकता नहीं होती। इससे नकदी संकट का सामना कर रहे ऋणधारकों को आसानी हो सकती है।