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SEBI ने डेरिवेटिव सेगमेंट के स्टॉक्स के प्राइस बैंड के नियम बदले, जानिए निवेशकों पर क्या पड़ेगा असर

डायनेमिक प्राइस बैंड एक रेंज है, जिसमें स्टॉक क प्राइस ऊपर या नीजे जा सकता है। इसकी मकसद अचानक स्टॉक की कीमतों में बहुत ज्यादा तेजी या गिरावट को रोकना है

MoneyControl Newsअपडेटेड May 27, 2024 पर 12:11 PM
SEBI ने डेरिवेटिव सेगमेंट के स्टॉक्स के प्राइस बैंड के नियम बदले, जानिए निवेशकों पर क्या पड़ेगा असर
डेरिवेटिव सेगमेंट के स्टॉक्स के लिए प्राइस बैंड की शुरुआत पिछले ट्रेडिंग सेशन के क्लोजिंग प्राइस के 10 फीसदी से होती है।

सेबी ने डेरिवेटिव सेगमेंट के शेयरों के डायनेमिक प्राइस बैंड सिस्टम को बेहतर बनाने के लिए नए नियम जारी किए हैं। इससे अचानक शेयर प्राइसेज में आए उछाल, प्राइसेज में गड़बड़ी रोकने में मदद मिलेगी। साथ ही रिस्क मैनेजमेंट भी बढ़ेगा। डायनेमिक प्राइस बैंड का मतलब एक दायरे से है, जिसमें स्टॉक का प्राइस किसी दिन ऊपर या नीजे जा सकता है। अचानक स्टॉक की कीमतों में बहुत ज्यादा तेजी या गिरावट रोकने के लिए डायनेमिक प्राइस बैंड का सिस्टम शुरू किया गया था। डेरिवेटिव सेगमेंट के स्टॉक्स के लिए प्राइस बैंड की शुरुआत पिछले ट्रेडिंग सेशन के क्लोजिंग प्राइस के 10 फीसदी से होती है।

नए नियम में यूसीसी की संख्या बढ़ाई गई

अभी के नियम के मुताबिक, शेयर की कीमत 9.90 फीसदी या ज्यादा चढ़ने या उतरने की स्थिति में प्राइस बैंड (price band) की फ्लेक्सिंग के लिए हर साइड से कम से कम 5 यूनिक क्लाइंट कोड (UCC) से 25 ट्रेड होने चाहिए। नए नियम में 5 यूसीसी की संख्या बढ़ाकर कम से कम 10 कर दी गई है। इनके तरफ से अब 50 ट्रेड जरूरी होंगे। नए नियम का असर यह होगा कि प्राइस बैंड के एडजस्टमेंट के लिए अब ज्यादा ट्रेडिंग वॉल्यूम जरूरी होगा। इससे बाजार में उतारचढ़ाव की स्थिति में किसी स्टॉक के प्राइस पर किसी सिंगल ट्रेड का असर घटेगा।

मार्केट पार्टिसिपेंट्स को होगा यह फायदा

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