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SEBI ने चपरासी को 37 लाख चुकाने का दिया आदेश, सच्चाई जानने के बाद देनदारी से फ्री किया

तसलीम आरिफ खान उन 13 लोगों में शामिल थे, जिन्हें निवेशकों को पैसा लौटाने को कहा गया था। सेबी ने इस बारे में जून 2018 में आदेश पारित किया था। दरअसल खान इस कंपनी में चपरासी थे। उन्होंने एक साल तक पश्चिम बंगाल की इस कंपनी में काम किया था

MoneyControl Newsअपडेटेड Apr 11, 2025 पर 5:36 PM
SEBI ने चपरासी को 37 लाख चुकाने का दिया आदेश, सच्चाई जानने के बाद देनदारी से फ्री किया
यह मामला 2018 का है। इस कंपनी का नाम ग्रीनबैंड एग्रो है। इस कंपनी ने वित्त वर्ष 2012 और वित्त वर्ष 2014 के बीच निवेशकों को एनसीडी के जरिए यह पैसा जुटाया था।

सेबी ने एक चपरासी सहित कंपनी के डायरेक्टर्स और प्रमोटर्स को निवेशकों को 36.97 लाख रुपये लौटाने का आदेश दिया। यह मामला 2018 का है। इस कंपनी का नाम ग्रीनबैंड एग्रो है। इस कंपनी ने वित्त वर्ष 2012 और वित्त वर्ष 2014 के बीच निवेशकों को एनसीडी के जरिए यह पैसा जुटाया था। सेबी ने जांच में पाया कि कंपनी ने एनसीडी इश्यू से जुड़े कई नियमों का उल्लंघन किया था। चूंकि, यह एनसीडी 200 से ज्यादा लोगों को इश्यू किया गया था, जिससे यह पब्लिक ऑफर के तहत आता था। इसलिए कंपनी को इश्यू से जुड़े नियमों का पालन करना जरूरी था।

खान सहित 13 लोगों पैसे लौटाने को कहा गया था

तसलीम आरिफ खान उन 13 लोगों में शामिल थे, जिन्हें निवेशकों को पैसा लौटाने को कहा गया था। SEBI ने इस बारे में जून 2018 में आदेश पारित किया था। दरअसल खान इस कंपनी में चपरासी थे। उन्होंने एक साल तक पश्चिम बंगाल की इस कंपनी में काम किया था। उनका काम कंपनी के ऑफिस में आने वाले लोगों को पानी पिलाना था। उन्हें इस बात की कोई जानकारी नहीं थी कि कंपनी ने उन्हें नॉन-एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर बनाया था।

कंपनियों के प्रमोटर्स ऐसे फर्जीवाड़ा करते रहते हैं

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