सेबी ने हितों के टकराव और डिसक्लोजर्स से जुड़े नियमों पर विचार के लिए एक हाई लेवल कमेटी बना दी है। मार्केट रेगुलेटर ने 9 अप्रैल को इसका ऐलान किया। इस कमेटी में छह सदस्य हैं। यह कमेटी सेबी के बोर्ड मेंबर्स और अधिकारियों की प्रॉपर्टी, इनवेस्टमेंट और लायबिलिटीज से जुड़े नियमों पर भी विचार करेगी। पूर्व चीफ विजिलेंस कमिश्नर (सीवीसी) इसके चेयरमैन हैं। कोटक महिंद्रा बैंक के पूर्व सीईओ उदय कोटक इसके सदस्य हैं।
सेबी के कामकाज में पारदर्शिता बढ़ेगी
पूर्व एमसीए सेक्रेटरी और IFSC अथॉरिटी के पूर्व चेयरमैन आई श्रीनिवास को इस समिति का वाइस चेयरमैन बनाया गया है। उदय कोटक कॉर्पोरेट गवर्नेंस पर बनी सेबी की समिति के अध्यक्ष रह चुके हैं। सेबी की हाई-लेवल कमेटी (Sebi High Level Committee) सेबी बोर्ड के सदस्यों और अधिकारियों के हितों से टकराव से जुड़े नियमों की समीक्षा के बाद अपनी राय देगी। इससे सेबी के कामकाज में पारदर्शिता बढ़ेगी। सेबी ने नए चेयरमैन तुहिन कांत पांडेय ने मार्केट रेगुलेटर के अधिकारियों के हितों के टकराव से जुड़े नियमों की समीक्षा करने की बात कही थी।
पिछले महीने बोर्ड ने प्रस्ताव को दी थी मंजूरी
सेबी के बोर्ड ने पिछले महीने इस कमेटी को बनाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। इस हाई-लेवल कमेटी के कामकाज का दायरा तय कर दिया गया है। यह हितों के टकराव, डिसक्लोजर्स और दूसरे मसलों से जुड़ी मौजूदा पॉलिसी पर विचार करेगी। मौजूदा नियमों की खामियों को पहचान कर उसे दूर करने के बारे में अपने सुझाव देगी। कमेटी हितों के टकराव को रोकने के लिए व्यापक फ्रेमवर्क बनाने के बारे में भी अपनी राय देगी।
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कमेटी की रिपोर्ट 3 महीनों में आने की उम्मीद
सेबी की इस उच्च-स्तरीय कमेटी के तीन महीने के अंदर अपनी सिफारिशें सौंप देने की उम्मीद है। उसके बाद इन सिफारिशों को मंजूरी के लिए सेबी के बोर्ड में पेश किया जाएगा। अभी सेबी के बोर्ड मेंबर्स के लिए हितों के टकराव से जुड़े जो नियम हैं, वे 2008 के हैं। तब से इनमें किसी तरह का बड़ा संशोधन नहीं किया गया है। हिंडनबर्ग रिसर्च की रिपोर्ट के बाद सेबी के बोर्ड मेंबर्स और अधिकारियों के हितों के टकराव के नियमों में संशोधन की जरूरत महसूस की गई थी।