सेबी ने इंडेक्स फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (एफएंडओ) कॉन्ट्रैक्ट्स में ट्रेडिंग मेंबर्स (टीएम) की पोजीशन लिमिट बढ़ा दी है। मार्केट रेगुलेटर ने 15 अक्टूबर को इसका ऐलान किया। अब ट्रेडिंग मेंबर्स के लिए (क्लाइंट एंड प्रॉपरायटरी ट्रेड्स दोनों शामिल) पॉजिशन लिमिट 7,500 करोड़ रुपये या मार्केट में टोटल ओपन इंटरेस्ट (ओआई) का 15 फीसदी होगी। पहले यह 500 करोड़ रुपये या टोटल मार्केट इंटरेस्ट का 15 फीसदी थी। इसका मतलब है कि पोजिशन लिमिट बढ़ाकर 15 गुना कर दी गई है। नया नियम तुरंत प्रभाव से लागू हो गया है।
नई पोजीशन लिमिट प्रॉपरायटरी ट्रेड्स और क्लाइंट ट्रेड्स दोनों पर लागू
SEBI ने इस बारे में एक रिलीज जारी की है। इसमें कहा गया है कि नई पोजीशन लिमिट फ्यूचर्स एंड ऑप्शन (F&O) कॉन्ट्रैक्ट्स के सभी ओपन पोजिशन पर अलग-अलग लागू होगी। नई पोजीशन लिमिट प्रॉपरायटरी ट्रेड्स और क्लाइंट ट्रेड्स दोनों पर लागू होगी। प्रॉपरायटरी ट्रेड्स का मतलब ऐसे ट्रेड से हैं, जिसमें ट्रेडिंग फर्म खुद अपना पैसे को इनवेस्ट करती है। क्लाइंट ट्रेड्स में ट्रेडिंग फर्म क्लाइंट की तरफ से उसके पैसे को इनवेस्ट करती है।
पोजीशन लिमिट की मॉनिटरिंग का तरीका भी बदलेगा
सेबी को मार्केट पार्टिसिपेंट्स से इस बारे में फीडबैक मिला था। उसके बाद इस मसले पर सेकेंडरी मार्केट एडवायजरी कमेटी (SMAC) ने विचार किया था। मार्केट रेगुलेटर इस लिमिट के मॉनिटरिंग के तरीके में भी बदलाव कर रहा है। नया तरीका 1 अप्रैल, 2025 से लागू हो जाएगा। उसके बाद सेबी पिछले ट्रेडिंग डे के अंत में टोटल मार्केट ओपन इंटरेस्ट के आधार पर लिमिट को ट्रैक करेगा। इससे मार्केट में टोटन ओपन इंटरेस्ट अचानक घट जाने जबकि ट्रेडिंग मेंबर्स की पॉजिशन सेम (पहले जितना) बने रहने की स्थिति में ट्रेडर्स पर पेनाल्टी नहीं लगाई जाएगी। इसे 'पैसिव ब्रीच' कहा जाता है। ऐसी स्थिति में ट्रेडर्स को अपनी पोजीशन अनवाइंड नहीं करनी होगी।
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एफएंडओ के ट्रेडिंग नियमों में बदलाव पर बढ़ा है सेबी का फोकस
पिछले कुछ महीनों में फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस ट्रेडिंग के नियमों में बदलाव पर सेबी का फोकस बढ़ा है। मार्केट रेगुलेटर ने एफएंडओ ट्रेडिंग के नियमें में कई बड़े बदलाव के ऐलान इस महीने की पहली तारीख को किया था। नए नियमों से कुछ अगले महीने की 20 तारीख से लागू हो जाएंगे। बाकी नियम चरणबद्ध तरीके से लागू होंगे। सेबी ने चरणबद्ध तरीके से इसलिए नए नियमों को लागू नहीं करने का फैसला किया ताकि ट्रेडर्स को ज्यादा दिक्कत का सामना नहीं करना पड़े।